एफडीपी के दूसरे दिन शिक्षकों ने सीखे एआई आधारित शिक्षण और मूल्यांकन के नए तरीके
इसरो, एनएमआईएमएस, केयू और आईआईआईटी के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव।
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी), कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग और डीएवी शताब्दी कॉलेज, फरीदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) के दूसरे दिन शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित शिक्षण, मूल्यांकन और शोध के आधुनिक तरीकों का प्रशिक्षण दिया गया। मंगलवार को विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने एआई के शैक्षणिक और शोध क्षेत्र में बढ़ते उपयोग पर व्याख्यान दिए।
आईआईआरएस-इसरो के डॉ. अनिल कुमार ने रिमोट सेंसिंग, भू-स्थानिक तकनीक, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और प्रिसिजन एग्रीकल्चर में एआई की उपयोगिता बताई। एनएमआईएमएस, मुंबई के रजिस्ट्रार प्रो. तन्मय चक्रवर्ती ने उच्च शिक्षा में एआई, सोशल नेटवर्क और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग की भूमिका पर प्रकाश डाला। कुरुक्षेत्र विवि के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार ने आउटकम बेस्ड एजुकेशन (ओबीई) को एआई आधारित शिक्षण से अधिक प्रभावी बनाने के उपाय बताए। प्रो. नसीब सिंह ने चैट जीपीटी, जेमिनी, क्लॉड, परप्लेक्सिटी और नोटबुकएलएम जैसे एआई टूल्स के शैक्षणिक उपयोग की जानकारी दी।
दूसरे दिन के अंतिम सत्र में आईआईआईटी श्री सिटी के प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने एआई की मदद से दक्षता मूलक प्रश्न पत्र निर्माण, पारदर्शी मूल्यांकन और एनईपी-2020 के अनुरूप आकलन प्रक्रिया को सरल बनाने के तरीके बताए। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने विशेषज्ञों से संवाद कर एआई को शिक्षण और शोध में प्रभावी ढंग से अपनाने के व्यावहारिक उपाय भी सीखे।
Girish Saini 

