कोई भी एक हार जीवन की अंतिम हार नहीं होतीः गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद

जीजेयू में आगामी सत्र से शुरू होगा बीए-एमए भगवद्गीता कोर्स।

कोई भी एक हार जीवन की अंतिम हार नहीं होतीः गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद

हिसार, गिरीश सैनी। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा है कि कोई भी एक हार जीवन की अंतिम हार नहीं होती। स्वयं को स्वयं से उठाओ, रास्ते बहुत हैं, आकाश खुला है। गीता जीवन के इसी संदेश के साथ क्षमताओं का विकास करती है और व्यक्ति को अंदर से सक्षम बनाती है। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि के सौजन्य से सक्षम युवा, समर्थ भारतः गीता का दिव्य मार्गदर्शन विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि भारत में क्षमताओं की कमी नहीं है। मानव, खनिज, बौद्धिक, भौतिक तथा आर्थिक संसाधन सभी दृष्टि से भारत अग्रणी है। आवश्यकता केवल यह है कि भारत का युवा संकल्पित हो, खुद को सक्षम बनाए। न केवल सक्षम बनाए बल्कि स्वामी विवेकानंद और अर्जुन जैसे आदर्शों को समक्ष रखते हुए वैसा ही बनने का प्रयास करें। निश्चित रूप से भारत वर्ष 2047 तक न केवल आर्थिक विकास की दृष्टि से बल्कि पारंपरिक, सैद्धांतिक, चारित्रिक तथा विश्व बंधुत्व की दृष्टि से भी विकसित होकर नई गाथा लिखेगा।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और खिलाड़ी मनु भाकर का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार इन्होंने गीता के आदर्शों को अपनाकर अपने जीवन की श्रेष्ठ सफलताओं को हासिल किया। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे एकाग्र होकर आत्मविश्वास से चारित्रिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ें, निश्चित तौर पर उन्हें श्रेष्ठ सफलताएं मिलेंगी।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि विवि आगामी सत्र से एनईपी-2020 के तहत गीता ज्ञान संस्थान, कुरूक्षेत्र के संयुक्त तत्वाधान में इंटीग्रेटेड बीए-एमए भगवद्गीता कोर्स आरंभ करेगा। ये कोर्स नवाचार के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और विशेष एमओयू के तहत संचालित होगा।

इस दौरान स्वामी ज्ञानानंद ने इंटीग्रेटेड बीए-एमए भगवद्गीता कोर्स का ब्रोशर जारी किया गया तथा विवि की शोध पत्रिका समराथल धारा के नए अंक का विमोचन किया।