नीड-बेस्ड रिसर्च तथा शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश है समय की मांगः अतुल कोठारी
सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ।
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर द्वारा - वर्तमान शिक्षा परिदृश्य में भारतीय ज्ञान प्रणाली का एकीकरण विषय पर सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारंभ किया गया। राधाकृष्णन सभागार में आयोजित उद्घाटन सत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने बतौर मुख्य वक्ता विचार रखे।
मुख्य वक्ता अतुल कोठारी ने कहा कि भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने का मार्ग शिक्षा से होकर जाता है और इस शिक्षा की नींव भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 का मूल स्वरूप भारतीयता से जुड़ा है, अतः इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों को नीति का गंभीर अध्ययन करना आवश्यक है। उन्होंने औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने का आह्वान करते हुए शिक्षा में भारतीय ज्ञान, दर्शन और संस्कृति के समावेश पर विशेष बल दिया।
कोठारी ने कहा कि विश्व भारतीय ज्ञान की महानता को स्वीकार करता है, किंतु आज आवश्यकता है कि भारतीय समाज स्वयं अपनी ज्ञान परंपरा को गहराई से समझे। उन्होंने नीड-बेस्ड रिसर्च तथा शिक्षा में आध्यात्मिकता के समावेश को समय की मांग बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि एक समग्र जीवन शैली है। इसे अपनाकर ही हम अपनी शिक्षा प्रणाली को अधिक मूल्यनिष्ठ और प्रभावी बना सकते हैं। कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने भारतीय ज्ञान की वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. मुनीष गर्ग ने स्वागत भाषण में एफडीपी की विषयवस्तु एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. माधुरी हुड्डा ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.पी. सिंघल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. कुंदन मित्तल सहित शिक्षक व प्रतिभागी मौजूद रहे।

Girish Saini 

