सांसद दीपेन्द्र हुड्डा का तंज - जंगलों को खत्म करने की मंशा रखने वाले कर रहे जंगल सफारी की बात

अरावली पर केंद्र सरकार द्वारा देश से माफी मांग कर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग की।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा का तंज - जंगलों को खत्म करने की मंशा रखने वाले कर रहे जंगल सफारी की बात

गुरुग्राम, गिरीश सैनी। रोहतक से लोकसभा सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने अरावली के महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की गलत पैरवी, गलत नीयत पर सवाल उठाए हैं।

जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस गलत नीयत से सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की और 100 मीटर की परिभाषा को कोर्ट से मंजूर कराया, उसे देश की जनता नकार रही है क्योंकि जनता ने अरावली को बेचने की सरकार की नीयत और चोरी को पकड़ लिया है। 100 मीटर के पैरामीटर को ना सिर्फ जनता नकार रही है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की एम्पावर्ड कमेटी ने भी कहा कि सौ मीटर का कोई औचित्य नहीं है। खुद सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में इसके औचित्य को नकार दिया था। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने की बैक डोर से कोशिश देश की जनता कामयाब नहीं होने देगी।

दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग की है कि 100 मीटर के निर्णय को निरस्त कराने के लिये सरकार स्वयं सुप्रीम कोर्ट जाए और देश की जनता से माफी मांगकर रिव्यू पिटिशन फाइल करे। सरकार अरावली को लावारिस न समझे, राजस्थान के साथ हरियाणा की जनता मिलकर अरावली और पर्यावरण को बचाने की लड़ाई लड़ेगी।

सांसद हुड्डा ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार व राज्य सरकारों के स्टैंड को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मांग की कि हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट में अरावली मुद्दे पर दिया गया हलफनामा सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन सिर्फ छलावा है और जनता को गुमराह करने का असफल प्रयास है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जंगलों को खत्म करने की मंशा रखने वाले लोग जंगल सफारी की बात कर रहे हैं। आज जब दुनिया का सबसे प्रदूषित वातावरण हरियाणा-दिल्ली-एनसीआर में बना हुआ है, उस समय सरकार ने 100 मीटर वाला निर्णय लेकर अरावली को खत्म करने जैसा फैसला ले लिया। जबकि होना तो ये चाहिए था कि सरकार संकल्प लेती कि अरावली में लाखों करोड़ों की तादाद में वृक्षारोपण करायेगी, ताकि सांस लेने के लिये स्वच्छ हवा मिल सके।

सांसद ने कहा कि बड़े पैमाने पर अवैध खनन के साथ ही बड़ी-बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां इस क्षेत्र में घुस गयी हैं। अवैध खनन से अरावली में भारी नुकसान हुआ है। हरियाणा में सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अवैध खनन से राज्य में करीब 5000 करोड़ का घोटाला हुआ। उन्होंने कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार ने भी बिल्डर लॉबी, माइनिंग लॉबी, बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट, बिजनेस हाउसेस से संबंधित लॉबीज के दबाव में उनसे मिलीभगत करके 100 मीटर की परिभाषा गढ़ने की पहल की है। सुप्रीम कोर्ट ने नया जो स्टैंड लिया, इसके पीछे पूरी तरीके से भारतीय जनता पार्टी की केंद्र की सरकार और प्रदेश की बीजेपी सरकारों की गलत पैरवी जिम्मेदार है।

दीपेन्द्र हुड्डा ने बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र में और हरियाणा विधानसभा में भी पर्यावरण तथा अरावली मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने नोटिस दिया, लेकिन सरकार ने चर्चा तक करने से मना कर दिया। अगर पर्यावरण और अरावली को बचाने, गुरुग्राम, फरीदाबाद के मुद्दों की चर्चा देश की संसद या हरियाणा विधानसभा में नहीं होगी तो क्या अमेरिका के सीनेट में और लंदन के हाउस ऑफ कॉमंस में होगी।

इस दौरान विधायक आफताब अहमद, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज, पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया, गुड़गांव शहरी कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज डावर, गुड़गांव ग्रामीण कांग्रेस जिलाध्यक्ष वर्धन यादव, रेवाड़ी ग्रामीण कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुभाष चंद छाबड़ी, पटौदी से कांग्रेस प्रत्याशी रही पर्ल चौधरी, गुड़गांव से मेयर प्रत्याशी रही सीमा पाहुजा आदि मौजूद रहे।