सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सीएपीएफ विधेयक-2026 पर कांग्रेस पार्टी की ओर से की चर्चा, सीएपीएफ कर्मियों के अधिकार देने की मांग की
रोहतक/नई दिल्ली, गिरीश सैनी। रोहतक से लोकसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने लोकसभा में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से चर्चा करते हुए कहा कि अग्निपथ योजना लाकर मिलिट्री को कच्चा करने वाली बीजेपी सरकार से पैरा-मिलिट्री के अधिकारी, जवान न्याय की क्या उम्मीद करें।
उन्होंने कहा कि सरकार जो कानून लेकर आई, ये सीएपीएफ कर्मियों के जीवन और उनके भविष्य पर तलवार लटकाने का काम करेगा। उन्होंने सरकार के दोहरे रवैये पर कहा कि देश के गृहमंत्री ने इसी सदन में कहा कि हमने नक्सलियों को साफ कर दिया, लेकिन आज सीएपीएफ बिल 2026 के जरिये भाजपा सरकार ने सीएपीएफ जवानों और अफसरों के भविष्य की संभावनाओं को ही साफ कर दिया है।
दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग की कि सीएपीएफ के लिए एनएफएफयू लागू हो, सेना की तर्ज पर सीएपीएफ कर्मियों को ओल्ड पेंशन दी जाए, देश के हर राज्य में सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर का अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए और स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढाते हुए सीजीएचएस डिस्पेंसरी का विस्तार किया जाए। उन्होंने मांग की कि रोहतक, रेवाड़ी और बहादुरगढ़ में उनके द्वारा मंजूर कराई गई तीनों सीजीएचएस डिस्पेंसरी को बनाया जाए। नई बटालियन बने औऱ फोर्स बढ़ाई जाए।
उन्होंने रोहतक के मोखरा निवासी सीआऱपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक (जिन्होंने हाल ही में छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से लोहा लेते हुए अपना एक पैर गंवा दिया) के अदम्य साहस की गाथा संसद में साझा करते हुए सीएपीएफ कर्मियों के अधिकार देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अजय मलिक की तरह ही राजस्थान के चेतन चीता, बिहार के विभोर, महाराष्ट्र के सागर बुराडे जैसे सैंकड़ों सीएपीएफ के काडर ऑफिसर आज भी अपने प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं।
दीपेन्द्र हुड्डा ने सेना की तर्ज पर सीएपीएफ कर्मियों को ओल्ड पेंशन देने की मांग भी की। उन्होंने सीएपीएफ के पे-स्केल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में बीजेपी सरकार की कैबिनेट ने सीएपीएफ अधिकारियों के लिए एनएफएफयू मंजूर किया था। लेकिन आज इस बिल के माध्यम से उसको भी निरस्त किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री ने सभी सीएपीएफ सैनिकों को साल में 100 दिन के अवकाश की घोषणा की थी। अभी सीएपीएफ कर्मियों को 60 दिन का अवकाश का प्रावधान है, जिसमें से सीआईएसएफ जवान को मात्र 30 दिन का अवकाश दिया जाता है। इनकी छुट्टियों को बढ़ाया जाए।
उन्होंने आर्मी फ्लैग डे फंड की तर्ज पर पैरा-मिलिट्री फ्लैग डे फंड बनाने की भी मांग की ताकि जरूरत पड़ने पर पूर्व सैनिक व उनके परिवार को आर्थिक सहायता मिल सके। उन्होंने देश के हर राज्य में सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन किए जाने की भी मांग की। सांसद हुड्डा ने इन सभी मांगों को मानते हुए सीएपीएफ, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी के जवानों और अफसरों को न्याय देने की मांग की।

Girish Saini 

