मोबाइल ने बदली पत्रकारिता की दिशा, डॉ. कृष्ण की पुस्तक मोजो का लोकार्पण

विद्यार्थियों से निर्भीक और जिम्मेदार पत्रकारिता करने का आह्वान

मोबाइल ने बदली पत्रकारिता की दिशा, डॉ. कृष्ण की पुस्तक मोजो का लोकार्पण

रोहतक, गिरीश सैनी। मोबाइल जर्नलिज्म (मोजो) ने पत्रकारिता के तौर-तरीकों और स्वरूप में बड़ा बदलाव किया है। मोबाइल के जरिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी त्वरित और प्रभावी समाचार कवरेज संभव हुई है। साथ ही, घटनास्थल पर रिपोर्टिंग और छुपे तथ्यों को सामने लाने में भी मोजो की भूमिका बढ़ी है। ये विचार एमडीयू के विवेकानंद पुस्तकालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के पूर्व विद्यार्थी एवं चौ. रणबीर सिंह विवि, जींद के प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार की पुस्तक मोजो के लोकार्पण समारोह में वक्ताओं ने व्यक्त किए।

पुस्तक का लोकार्पण डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणदीप राणा, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. सरोजनी नांदल तथा पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार ने किया। निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी भी मौजूद रहे।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. रणदीप राणा ने कहा कि मोबाइल जर्नलिज्म को सही मायने में जर्नलिज्म इन मोबाइल कहा जा सकता है। इसके माध्यम से दूर-सुदूर क्षेत्रों तक खबरों की पहुंच बनी है और कई छुपे हुए सत्य सामने आए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से निर्भीक और जिम्मेदार पत्रकारिता करने का आह्वान किया।

प्रो. सरोजनी नांदल ने कहा कि मोबाइल जर्नलिज्म जैसे समकालीन विषय पर पुस्तक का प्रकाशन समय की जरूरत है। प्रो. हरीश कुमार ने कहा कि विकट परिस्थितियों और आपदा के दौरान घटनास्थल से प्रभावी रिपोर्टिंग में मोजो बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।

लेखक डॉ. कृष्ण कुमार ने पुस्तक की रचना के उद्देश्य बताते हुए प्रो. सरोजनी नांदल और लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक का आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. सीमा देसवाल ने किया, जबकि आभार निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी ने व्यक्त किया। इस दौरान सीआरएसयू जींद के पत्रकारिता के प्राध्यापक डा. बलराम सिंह, डीजीसी कॉलेज गुरुग्राम के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डा. प्रदीप कुमार तथा हरियाणा सरकार के अधिकारी संदीप कुमार ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में इग्नू (नई दिल्ली) की सहायक निदेशक एवं प्रभारी जनसंपर्क डा. शिखा राय, सांख्यिकी गणित विभाग की प्रोफेसर डा. सीमा मेहरा, सीआरएसयू के प्राध्यापक डा. गौरव तरार, शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद रहे।