एमडीयूः शिक्षण, शोध और अकादमिक लेखन में एआई के उपयोग पर महत्वपूर्ण सत्र आयोजित
विशेषज्ञों ने एआई को शिक्षा और शोध को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और नवाचार आधारित बनाने का सशक्त माध्यम बताया।
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशंस विभाग, एमडीयू तथा डीएवी शताब्दी महाविद्यालय, फरीदाबाद के सहयोग से आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत बुधवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के शिक्षण, शोध और अकादमिक लेखन में उपयोग पर चार महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए।
प्रथम सत्र में -आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर टीचिंग एंड लर्निंग विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान देते हुए डॉ. श्रीराम पांडेय ने कहा कि एआई शिक्षा व्यवस्था में तेजी से बदलाव ला रहा है, लेकिन यह कभी भी शिक्षक का स्थान नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि एआई को एक सहयोगी के रूप में अपनाते हुए शिक्षकों को अपनी आवश्यकताओं और शिक्षण उद्देश्यों के अनुसार उपयुक्त एआई टूल्स का चयन करना चाहिए।
उन्होंने प्रभावी एआई प्रॉम्प्ट तैयार करने के लिए आरसीटीसीआई मॉडल (रोल, कॉन्टैक्स्ट, टॉस्क, क्राइटेरिया और इटरेट) की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रॉम्प्टिंग वास्तव में लघु स्तर का इंस्ट्रक्शनल डिजाइन है। जितना बेहतर प्रॉम्प्ट होगा, एआई का परिणाम भी उतना ही उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण होगा।
दूसरे सत्र में प्रतिभागियों को विभिन्न एआई टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान शिक्षकों ने अलग-अलग शैक्षणिक कार्यों के लिए प्रभावी प्रॉम्प्ट तैयार करना सीखा और एआई आधारित शिक्षण तकनीकों का हैंड्स-ऑन अनुभव प्राप्त किया।
तीसरे सत्र में -एआई फॉर लिटरेचर रिव्यू एंड एकेडमिक राइटिंग विषय पर भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. एम. एन. होडा ने कहा कि उच्च शिक्षा में शोध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एआई का जिम्मेदारी पूर्ण और नैतिक उपयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने साहित्य समीक्षा, अकादमिक लेखन और शोध कार्यों में एआई टूल्स के प्रभावी उपयोग के साथ-साथ एकेडमिक इंटीग्रिटी बनाए रखने पर विशेष बल दिया। प्रो. होडा ने प्रतिभागियों को शोध लेखन की पूरी प्रक्रिया में एआई की उपयोगिता के व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से जानकारी दी।
संवादात्मक सत्र में शिक्षकों ने एआई आधारित शोध और लेखन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा और शोध को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और नवाचार आधारित बनाने का सशक्त माध्यम है, बशर्ते इसका उपयोग नैतिक मूल्यों और शैक्षणिक ईमानदारी के साथ किया जाए। इस दौरान एमएमटीटीसी निदेशक प्रो. मुनीष गर्ग, उपनिदेशक डॉ. माधुरी हुड्डा सहित प्रतिभागी मौजूद रहे।
Girish Saini 

