मनुष्यों को मानवीय बनाता है साहित्यः सुनित मुखर्जी

मनुष्यों को मानवीय बनाता है साहित्यः सुनित मुखर्जी

रोहतक, गिरीश सैनी। साहित्य में अनंत संभावनाएं समाहित है। साहित्य मनुष्यों को मानवीय बनाता है और जीवन के थपेड़ों को सहने की क्षमता विकसित करता है। साहित्य बेहतर और मानवीय समाज बनाने में योगदान देता है। ये उद्गार एमडीयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्राध्यापक सुनित मुख़र्जी ने बीएलजेएस कॉलेज, तोशाम में आयोजित बहुविषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर रिसोर्स पर्सन व्यक्त किए।

जब सब कुछ ख़त्म हो जाता है, साहित्य प्रारंभ होता है - विषय पर केंद्रित, उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में सुनित मुखर्जी ने समाज और जीवन में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल मीडिया के युग में साहित्य की प्रासंगिकता पर विशेष फोकस करते हुए कहा कि साहित्य बेजुबानों की जुबान होती है। साहित्य के बहुआयामी स्वरुप का विश्लेषण करते हुए सुनित मुखर्जी ने उपस्थित जन को साहित्य से जुड़ने का आह्वान किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ श्याम वशिष्ठ ने की। संगोष्ठी संयोजक अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ सोमेन्द्र शर्मा रहे।