विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और प्रबंधकीय शिक्षा को समाज एवं राष्ट्र के विकास से जोड़ें : विशेषज्ञ

एमडीयू में पीजी इंडक्शन प्रोग्राम में विद्यार्थियों को दिया सफलता और राष्ट्र निर्माण का मंत्र।

विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और प्रबंधकीय शिक्षा को समाज एवं राष्ट्र के विकास से जोड़ें : विशेषज्ञ

रोहतक, गिरीश सैनी। विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधकीय विज्ञान की उच्च शिक्षा का उपयोग समाज और राष्ट्र के लिए करने, तथा सामाजिक उत्थान, राष्ट्र निर्माण तथा मानव कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान एमडीयू में आयोजित स्नातकोत्तर (पीजी) इंडक्शन प्रोग्राम में विशिष्ट वक्ताओं ने नव-प्रवेश प्राप्त विद्यार्थियों से प्रेरित किया।

टैगोर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम के प्रात:कालीन सत्र में नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञ एवं बीएमयू रोहतक, आईजीयू रेवाड़ी और गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. मार्कण्डेय आहूजा ने मास्टर योर माइंड, मास्टर योर लाइफ विषय पर अपने संबोधन में विद्यार्थियों को मन पर नियंत्रण, सकारात्मक सोच, आत्मअनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया।

उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करते हुए परिणाम की चिंता से मुक्त होकर निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। विद्यार्थियों को गीता के कर्मयोग के सिद्धांत को जीवन में अपनाने तथा अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के कल्याण के लिए करने का आह्वान उन्होंने किया।

दोपहरकालीन सत्र में यूएचएसआर के पल्मोनोलॉजी एंड क्रिटिकल केयर विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुव चौधरी ने फ्रॉम साइंस टू सोसाइटी विषय पर प्रेरक संबोधन देते हुए कहा कि सामाजिक जुड़ाव के बिना विज्ञान अधूरा है और वैज्ञानिक उपलब्धियों का उद्देश्य समाज की जरूरतों को समझते हुए उनका समाधान करना होना चाहिए।

डॉ. ध्रुव चौधरी ने अल्बर्ट आइंस्टीन, सर सीवी रमन, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और महात्मा गाँधी के उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और नवाचार के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने अध्यक्षीय संबोधन में विद्यार्थियों को शिक्षा, शोध और नवाचार के साथ राष्ट्र प्रथम की भावना को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विवि की शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रतिभा और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना है। उन्होंने विद्यार्थियों से उत्कृष्टता, जिम्मेदारी और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणदीप राणा ने एमडीयू की विकास यात्रा, शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक ने विद्यार्थियों को विवेकानंद लाइब्रेरी की सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और डिजिटल सेवाओं से अवगत कराया।

डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. सपना गर्ग ने प्रारम्भ में स्वागत भाषण दिया। कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने आभार व्यक्त करते हुए नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें विवि की शैक्षणिक एवं अन्य सुविधाओं का भरपूर लाभ उठाकर अपने व्यक्तित्व और करियर को नई ऊंचाइयां देने का संदेश दिया।

प्राध्यापिका डॉ. महक डांगी और निदेशक जनसंपर्क सुनित मुख़र्जी ने मंच संचालन किया।