फुले-अंबेडकर के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर व्याख्यान आयोजित
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू की विधि विभागाध्यक्षा प्रो. सोनू देहमिवाल ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार आज भी सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के लिए मार्गदर्शक हैं। एसएमआरजे गवर्नमेंट कॉलेज, सिवानी में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी-सह-सेमिनार में व्याख्यान के दौरान प्रो. सोनू देहमिवाल ने अपने संबोधन में फुले और अंबेडकर के विचारों को कानूनी और नारीवादी दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनकी विचारधारा आज के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भी असमानताओं को चुनौती देती है। उन्होंने शिक्षण और अकादमिक विमर्श में इन विचारों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की 136वीं जयंती के उपलक्ष्य में वैश्वीकरण के दौर में फुले और आंबेडकर के विचारों के अध्ययन व शिक्षण की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि, यूजीसी शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव प्रो. जी.एस. चौहान ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. देसराज सभरवाल, प्रो. सतवीर सिंह, प्रो. परवीन फोगाट मौजूद रहे।
प्राचार्य प्रो. भूप सिंह गौर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्वानों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान प्रो. दीप्ति कौशिक, डॉ. बिनोय ज्योति दास, प्रो. सुभाष राजोरिया, प्रो. सुशील कुमार सैनी, प्रो. निशी बुरक, प्रो. मुकेश कुमार चाहल, प्रो. सुखवीर सिंह, डॉ. ज्योति सैनी और मनीषा यादव ने भी विषय पर विचार साझा किए।

Girish Saini 

