बीएमयू में सूरदास की प्रासंगिकता विषय पर व्याख्यान आयोजित
रोहतक, गिरीश सैनी। बाबा मस्तनाथ विवि, अस्थल बोहर के मानविकी संकाय अंतर्गत हिंदी विभाग द्वारा सूरदास जयंती के अवसर पर सूरदास की प्रासंगिकता विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वानों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बतौर मुख्य वक्ता, सूरदास पुरस्कार से सम्मानित डॉ. मधुकांत ने सूरदास के साहित्य की व्याख्या करते हुए कहा कि सूरदास की रचनाएँ केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय भक्ति परंपरा की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि सूरदास ने अपनी काव्य-रचनाओं के माध्यम से श्री कृष्ण की बाल लीलाओं, वात्सल्य भाव और भक्ति की गहराइयों को जिस सहजता एवं संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है, वह आज भी जनमानस को अभिभूत करती है।
मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. बी.के. झा ने सूरदास के जीवन, कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सूरदास की दृष्टि केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि अत्यंत मानवीय और संवेदनशील थी। उन्होंने कहा कि सूरदास की लेखनी में भक्ति और मानवीय मूल्यों का अद्वितीय समन्वय देखने को मिलता है।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. बाबूराम ने स्वागत संबोधन किया। कार्यक्रम संचालन डॉ. सुमन राठी ने किया। इस दौरान डॉ. सुधीर मलिक, डॉ. वरुण कुमार झा, डॉ. ब्रह्म प्रकाश, डॉ. यशपाल, डॉ. शीला दहिया, डॉ. मीनू, डॉ. सुशील, डॉ. हरिओम, डॉ. अतुल, डॉ. मनजीत, डॉ. सोनिका, डॉ. निधी सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

Girish Saini 

