ज्ञान सृजन और वैश्विक चुनौतियों का समाधान गुणवत्तापूर्ण शोध से ही संभवः कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ
जीनोमिक्स, एजिंग और बायोकेमिकल रिसर्च के नए आयामों पर मंथन के लिए एमडीयू में राष्ट्रीय कार्यशाला।
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने कहा कि शोध के बिना ज्ञान का सृजन, संवर्धन और समाज की प्रगति संभव नहीं है। आज डीएनए, जीनोम सीक्वेंसिंग, एजिंग पापुलेशन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय पूरी दुनिया में शोध के केंद्र में हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल नवाचार आधारित और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान से ही निकाला जा सकता है।
कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने सोमवार को एमडीयू के बायोकेमिस्ट्री विभाग में- फ्रंटियर्स इन बायोकेमिकल रिसर्च विषय पर शुरू हुई पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि युवा शोधार्थियों को पारंपरिक विषयों की सीमाओं से आगे बढ़कर इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च अपनानी चाहिए। वैज्ञानिक सोच, क्रिटिकल थिंकिंग और नवाचार ही भविष्य के अनुसंधान की पहचान होंगे। उन्होंने शोध को मानव जीवन की गुणवत्ता सुधारने, स्वस्थ समाज के निर्माण और पृथ्वी के संरक्षण से जोड़ने का आह्वान किया।
बतौर विशिष्ट अतिथि, जेएनयू के लाइफ साइंसेज विभाग के प्रो. दीपक मिश्रा ने कहा कि उत्कृष्ट शोध के लिए वैज्ञानिक जिज्ञासा, आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग और मौलिक सोच जरूरी है। उन्होंने शोधार्थियों को वैश्विक स्तर की गुणवत्ता वाले अनुसंधान की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. ए.एस. मान, डिप्टी डीन (आर एंड डी) प्रो. के.के. शर्मा तथा आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. बी. नरसिम्हन ने कहा कि बहुविषयक अनुसंधान, संस्थागत सहयोग और नवाचार की संस्कृति विकसित कर ही विवि शोध के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकते हैं।
प्रारंभ में विभागाध्यक्ष प्रो. नरसिंह चौहान ने स्वागत भाषण दिया। प्रो. रितु पसरीजा ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रो. विजय कुमार ने आभार व्यक्त किया। कुलपति ने इस दौरान कार्यशाला की स्मारिका का विमोचन भी किया।
Girish Saini 


