समाचार विश्लेषण/कांग्रेस और खून की खेती 

कंटीली धरती पर फूलों की खेती 

समाचार विश्लेषण/कांग्रेस और खून की खेती 
कमलेश भारतीय।

-कमलेश भारतीय 
किसान आंदोलन के सिवाय कुछ सूझता नहीं । जब तक यह आंदोलन चल रहा है तब तक सारा ध्यान इसी पर केंद्रित है । देश जैसे दिल्ली की सीमाओं पर सिमट गयी है । जम्मू कश्मीर या चीन की सीमा को नजरअंदाज तो नहीं किया जा रहा ? देश विदेश में किसान आंदोलन को रोकने के लिए कंटीली तारें और कीलें लगा देने पर सरकार की जो आलोचना हुई उससे ये कीलें हटा दी गयीं लेकिन सरकार को शर्मिंदा करने के लिए राकेश टिकैत ने कहा कि हम इसी जगह फूलों की खेती करने की घोषणा की है । सच कबीर की पंक्ति याद आ गयी : 
जो तोको कांटा बुबै , तोहि बोब तू फूल 
 

 

सरकार ने तो कीलें लगाई  लेकिन हम फूल लगायेंगे । खुशबू बिखेरेंगे । यह खुशबू फैलती जा रही है और  राकेश टिकैत का कैच ड्राॅप करने पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाथ मल रहे हैं और कसमसा रहे हैं । 

क्या इस आंदोलन के पीछे कांग्रेस का हाथ है? क्या कांग्रेस ने इस आंदोलन को हवा दी ? कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर सारा दोष कांग्रेस पर दो न कर कह रहे हैं कि कांग्रेस को खून की खेती करनी आती है और वह सिर्फ यही खेती करती है । दूसरी ओर कांग्रेस कह रही है कि सरकार इन तीन कानूनों को प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनाये ।  लोकसभा में इन कानूनों को लेकर हंगामा हो रहा है । सरकार यदि इसी तरह टिकी और अड़ी  रही तो खून की खेती करने का आरोप किस लिए ? यदि समय रहते समाधान नहीं किया तो यह आंदोलन फैलता चला जायेगा । फिर इसे जनांदोलन बनने से रोकना मुश्किल हो जायेगा । वैसे जनांदोलन का रूप लेता ही जा रहा है । गांव गांव फैल रहा है । अभी आज चक्का जाम है । हर वर्ग धरने दे रहा है किसान आंदोलन के पक्ष में ।