मेरी यादों में जालंधर-भाग-36

जीना इसी का नाम है : अनिल राव

मेरी यादों में जालंधर-भाग-36

- कमलेश भारतीय
क्या आपको सन् 1995 में डबवाली में हुए भयंकर अग्निकांड की याद है ? किसी और को याद हो या न हो एक शख्श है जिसे यह अग्निकांड आज तक सालता रहता है और वे हैं पूर्व उच्च पुलिस अधिकारी अनिल राव ! सन् 1995 में वे इस अग्निकांड से सिर्फ एक दिन पहले ही अपने परिवार को डबवाली लेकर आये थे और दूसरे दिन ही यह अग्निकांड हो गया, जिसमें उनकी साढ़े चार साल की बेटी सुरभि भी एक थी ! वे वहाँ डीएसपी के पद पर आये थे । इसके बावजूद वे दूसरे बच्चों को बचाने आग में ही कूद गये, जिसके निशान आज भी इनके शरीर पर हैं ! जीना इसी का नाम है ! 
सुरभि अजमेर में पढ़ रही थी लेकिन राव परिवार को कहीं घुमा फिरा लाने के लिए डबवाली ले आए थे और उनको यह दुखांत झेलना पड़ा । 
फिर क्या आपको संत राम रहीम का पंचकूला जाकर समर्पण करने का कुछ  याद है? वह गाड़ियों के काफिले के साथ पंचकूला जाना? उस सबको भी हरियाणा के उन दिनों सीआईडी चीफ के रूप में अंजाम दिया अनिल राव ने ही । हिसार के निकट संत रामपाल के आश्रम को तहस नहस करने और गिरफ्तार करने को जिसने बखूबी अंजाम दिया, वे कोई और नहीं बल्कि अनिल राव ही थे । साढ़े चार वर्ष तक हरियाणा के सीआईडी प्रमुख रहे और बाद में मुख्यमंत्री के सलाहकार! 
मेरी दोस्ती, मेरा परिचय हुआ सन् 2008 में जब वे हिसार में एस पी के पद पर आए ‌! कभी कभी बातों बातों में श्री राव के थियेटर के प्रति प्रेम का अहसास हुआ । मैं खुद पत्रकार के साथ साथ थियेटर का शौकीन ! इधर सांस्कृतिक रंगकर्मी डाॅ सतीश कश्यप ने देवी भवन के पास अपने घर में ओपेरा नाम से छोटा सा स्टुडियो बनाया और बातों बातों में पता चला कि वे किसी मुख्यातिथि की तलाश में हैं । मैंने राव का नाम सुझा दिया ! वे चौंके कि किसी पुलिस अधिकारी का थियेटर के अंगने में क्या काम ! पर मैंने कहा कि एक बार बुलाओ तो सही ! और उनको आमंत्रित करना तय हो गया ! उन्होंने उस छोटे से स्टुडियो में आकर बिना किसी तामझाम के सबसे आखिर में सभी दर्शकों की तरह नीचे बैठ कर‌ नाटक का आनंद‌ लिया, तब सबको पता चला कि राव तो थियेटर के दीवाने हैं और यह दीवानगी इस हद तक कि अपना पद तक ताक पर रख आम दर्शक की तरह थियेटर का आनंद‌ लेते हैं ! बस, बेशक राव यहाँ से चले गये लेकिन हिसार के ही नहीं, बल्कि हरियाणा के रंगकर्मी आज भी उनसे जुड़े हुए हैं ! यशपाल शर्मा भी  उनसे जुड़े हुए हैं और यह कहते हैं कि राव के जीवन पर आधारित फिल्म बनाऊंगा ! उन पर नेटफ्लिक्स पर फिल्में चल भी रही है। वे दोस्ती और दोस्तों को कभी नहीं भूलते ! रात बिरात भी फोन रिसीव कर व्यथा सुन कर जो कर सकते हैं, करते हैं। यह मेरा निजी अनुभव भी है ! 
वे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के ओएसडी भी रहे तीन वर्ष तक और आजकल डी ए वी संस्था की केंद्रीय समिति के उपाध्यक्ष के पद पर समाज को सेवाये दे रहे हैं । इसके अतिरिक्त देश के  फिल्म बोर्ड के भी सदस्य सहित न जाने कितनी सामाजिक स़स्थाओं से जुड़कर अपनी सेवायें दे रहे हैं! 
सच, जीना इसी का नाम है!