मेरी यादों में जालंधर-भाग 34

आम लोग के दर्द को बयान करतीं कविताएँ 

मेरी यादों में जालंधर-भाग 34

कमलेश भारतीय 
- आपको एक थोड़ी हंसी मज़ाक की बात बताता हूँ, भारतीय जी ! 
- जी हाँ, बताइये । 
- जब पंचकूला में हरियाणा के शिक्षा विभाग के लिए ' शिक्षा सदन बना, उन वे राज्य के हायर एजुकेशन विभाग के डीजी के पद पर तैनात थे । जैसे ही मुख्यमंत्री श्री हुड्डा ने इसका उद्घाटन किया, तब आसपास खड़े अन्य सहयोगी अधिकारियों ने कहा कि शिव रमण गौड़ जी के रहते इस भवन का नाम 'शिक्षा सदन' ही हो सकता था ! 
मुख्यमंत्री ने पूछा - वो क्यों भाई? 
सबने हंसी हंसी में कहा कि आप नहीं जानते कि गौड़ जी की पत्नी का नाम ही शिक्षा है ! 
सबके सब इस बात के मज़े लेते चाय के प्यालों की ओर बढ़ चले थे ! 
तभी भाभी शिक्षा हमारी चाय लेकर आ गयीं । ये थे हरियाणा के उस समय सूचना व संस्कृति विभाग के महानिदेशक शिवरमण गौड़ ! 
मैं पंचकूला में शनिवार- रविवार को एकदम खाली होता, जिन दिनों मुझे हरियाणा सरकार ने ग्रंथ अकादमी का कार्यभार सौंप रखा था । एक रविवार मैंने  श्री गौड़ को फोन किया क्या मैं मिलने आ सकता हूँ। उन्होंने सहर्ष मुझे अपने आवास पर आमंत्रित किया ! वे सर्दियों की खुली और खिली धूप के दिन थे और उस दिन भी धूप खिली हुई थी ! मैंने यह सुना था कि श्री गौड़ एक अच्छे अधिकारी ही नहीं,  बहुत संवेदनशील कवि भी हैं ! सोचा आज इनकी कविताएँ ही सुनी जायें और इनके कवि से रूबरू हुआ जाये । वेसे यह मेरी उनके साथ पहली मुलाकात नहीं थी । सबसे पहली मुलाकात हुई थी, कुरूक्षेत्र विश्विद्यालय के युवा व सास्कृतिक विभाग द्वारा शाहाबाद मारक़डा में एक युवा समारोह के निर्णायकों के तौर पर ! हम दोनों ही इसके तीन निर्णायकों में शामिल थे । इस तरह इनका फोन नम्बर उन दिनों से ही मैंने ले रखा था और दूसरी मुलाकात जिस दिन मैं उपाध्यक्ष के रूप में ज्वाइन करने गया ! उनके पास ही मुझे ज्वाइनिंग देने को कहा गया था । वे बड़ी विनम्रता से मिले थे और कहा था कि अभी आपका ऑफिस तैयार नहीं, आपकी पे आज से शुरू हो जायेगी लेकिन अभी हिसार लौट जाइये, जिस दिन आपका ऑफिस और गाड़ी आ जायेगी, आपको फोन कर बुला लेंगे ! 
खैर! हम खिली धूप वाली सर्दी का मज़ा चाय के साथ ले रहे थे । मैंने कहा कि आपके बारे में सुना है कि आप कविताएँ भी लिखते हैं!.
- जी, सही सुना है। 
- कोई काव्य संग्रह आया है? 
- हां आया है न! ' आम लोग '! 
- क्या आप इसे सुनायेंगे? 
- क्यों नही! 
फिर उन्होंने भाभी शिक्षा को आवाज़ लगाकर कहा कि मेरा कविता स़ग्रह लाना और संग्रह में से 'शरीफ लोग' कविता का पाठ किया, जिसकी शुरुआत देखिए : 
दनदनाती कारों के 
चीखते पहियों से दुबक कर 
एक ओर जो डरा सा खड़ा है
वह शरीफ आदमी है ! 

सच, कितनी संवेदनशील कविता,  जो मुझे आज तक नहीं भूली ! 
अब दूसरी कविता का अंशों देखिए : 
इतिहास के पन्ने बोलते हैं कि 
ये आम लोग कई बार 
दांव पर लगाये गये 
और कई बार 
हरा दिये गये 
और ये होते रहे कुर्बान ! 

इनके दो काव्य संग्रह ' आम लोग' व 'नयी सुबह तक ' आ चुके हैं और हरियाणा सरकार से सेवानिवृत्ति के बाद से पिछले पांच साल से श्री गौड़ देश के डी ए वी संस्थानों के डायरेक्टर हायर एजुकेशन के दायित्व को बड़ी कुशलता से निभा रहे हैं ! 
वे एक कविता में ही कहते हैं कि
बातें तो बहुत हैं करने को 
और अल्फाज़ भी हैं 
पर वो तड़प...
अब कुछ वदली बदली लगती है.... 

नहीं गौड़ भाई, आपका कवि अभी भी लिख रहा है और हम आपको पढ़ रहे हैं! 
बस, कल फिर नये मित्र की बात के साथ आऊंगा!