आधुनिक शोध से जोड़ें भारतीय ज्ञान परंपरा कोः डॉ. जोशी

एमडीयू के संस्कृत समारोह में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

आधुनिक शोध से जोड़ें भारतीय ज्ञान परंपरा कोः डॉ. जोशी

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के संस्कृत, पालि एवं प्राकृत विभाग में आयोजित संस्कृत समारोह में पंजाबी विवि, पटियाला के संस्कृत एवं पालि विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पींद्र जोशी ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की। समारोह में संस्कृत संभाषण, सूक्तिलेखन और श्लोक उच्चारण प्रतियोगिताएं हुई।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्याख्यान देते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि संस्कृत में उपलब्ध न्याय दर्शन, आयुर्वेद, काव्यशास्त्र और ज्योतिष जैसे ग्रंथ आज भी प्रासंगिक हैं। इनके ज्ञान को केवल परंपरागत दृष्टि से देखने के बजाय आधुनिक वैज्ञानिक अवधारणाओं और शोध के संदर्भ में समझने की जरूरत है। उन्होंने भारतीय ग्रंथों में निहित ज्ञान के समकालीन अध्ययन पर जोर दिया।

श्लोक उच्चारण में हिंदू कन्या महाविद्यालय की निकिता प्रथम, लाल नाथ हिंदू कॉलेज की सपना द्वितीय और गुरुकुल मंझावली के नेमिश तृतीय रहे। संस्कृत भाषण में ऋचा प्रथम, विश्वारा कन्या गुरुकुल की मोहिनी द्वितीय और गीता विद्या मंदिर की लेखा तृतीय रही। सूक्तिलेखन में गौड़ ब्राह्मण कॉलेज की विनती प्रथम, आईसी कॉलेज की तुलसी द्वितीय और एमडीयू की बबीता तृतीय रही।