वैज्ञानिक और प्रकृति के अनुकूल हैं भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा: कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ

वैज्ञानिक शोध को नवाचार से जोड़ने का आह्वान किया।

वैज्ञानिक और प्रकृति के अनुकूल हैं भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा: कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ

रोहतक, गिरीश सैनी। भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को विज्ञान क्षेत्र के संदर्भ में रेखांकित करते हुए एमडीयू में एक संगोष्ठी का आयोजन रसायन शास्त्र विभाग तथा विज्ञान भारती हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने वैज्ञानिक शोध को नवाचार से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि विज्ञान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण हेतु भारतीय ज्ञान परंपरा का विशेष योगदान है। उन्होंने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में समाहित पर्यावरण संरक्षण के मूल्य आज के वैश्विक संकटों का व्यावहारिक समाधान दे सकते हैं। कुलपति ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा सदैव वैज्ञानिक और प्रकृति के अनुकूल रही है। इसी समृद्ध विरासत से प्रेरणा लेकर देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट सिटी विकास को नई दिशा दी जा सकती है। 

वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों के दृष्टिगत उन्होंने वैज्ञानिकों, रसायन शास्त्रियों को जीरो नेट एमीशन पर वैज्ञानिक कार्य करने की जरूरत बताई। उन्होंने कृषि प्रधान राज्यों जैसे कि हरियाणा में पराली प्रबंधन में प्रभावी हस्तक्षेप हेतु शोध एवं नवाचार की बात भी कही। उन्होंने कहा कि भविष्य में एमडीयू में नवाचार, स्मार्ट अध्ययन तथा उद्यमिता पर विशेष फोकस रहेगा।

वीएम एसबी उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी, देहरादून की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से प्रेरणा लेकर राष्ट्रीय विकास का रास्ता प्रशस्त करना समय की जरूरत है। इस संबंध में मानव संसाधन के सदुपयोग पर उन्होंने विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत के आर्थिक विकास हेतु मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

एमडीयू के कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने भारतीय ज्ञान परंपरा को भारत की समृद्ध विरासत का अभिन्न अंग बताया तथा इस गोष्ठी के लिए शुभकामनाएं व्यक्त की। रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. देवेन्द्र सिंह ने स्वागत भाषण दिया और कार्यशाला की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। मंच संचालन डॉ. संगीता ने किया।

इस दौरान सीसीएस एचएयू, हिसार के कुलपति प्रो. बी.आर. कम्बोज बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक डॉ. प्रताप सिंह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यशाला में डीन सीडीसी प्रो. राजेश पूनिया, प्राध्यापक - प्रो. प्रीति बूरा, प्रो. हरिओम, प्रो. नवीन कुमार सहित हरियाणा के विभिन्न विवि के प्राध्यापक, शोधार्थी, संगठन मंत्री आकाश पाण्डे शामिल हुए।