भारतीय दर्शन वर्तमान समय में विश्व परिदृश्य में पहले से भी अधिक प्रासंगिक: राज्यपाल कविंदर गुप्ता

लद्दाख विवि, लेह में -विश्व शांति और भारत दर्शन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित।

भारतीय दर्शन वर्तमान समय में विश्व परिदृश्य में पहले से भी अधिक प्रासंगिक: राज्यपाल कविंदर गुप्ता

लेह, गिरीश सैनी। लद्दाख विवि, लेह, हिमालय परिवार, सिंधु दर्शन तथा गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि, हिसार के संयुक्त तत्वावधान में -विश्व शांति और भारत दर्शन विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन लद्दाख विवि, लेह के मुख्य सभागार में किया गया।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं हिमालय परिवार के संरक्षक डॉ. इन्द्रेश कुमार रहे। राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. के.सी. शर्मा, जीजेयू के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई, लद्दाख विवि के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा, हिमालय परिवार के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष परमजीत सिंह गिल तथा पद्मश्री डॉ. पद्मा गुरमीत इस दौरान विशेष रूप से उपस्थित रहे।

राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने विश्व को आर्थिक प्रगति के साथ-साथ आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग भी दिखाया है। भारत का दर्शन संघर्ष नहीं, समन्वय सिखाता है। भारतीय दर्शन वर्तमान समय में विश्व परिदृश्य में पहले से भी ज्यादा प्रासंगिक है। वर्तमान विश्व जिस प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहा है, भारतीय दर्शन में उन सबका समाधान है। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन हमें सिखाता है कि विभिन्नताओं में भी सौहार्द व सहयोग का वातावरण निर्मित किया जा सकता है। हम प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि पूजनीय व अपने दैनिक जीवन का अंग मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना, आध्यात्मिक विरासत व सभ्यता के मूल्यों के पुनर्स्मरण व पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण अभियान है।

आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं हिमालय परिवार के संरक्षक डॉ. इन्द्रेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सभ्यता विश्व की श्रेष्ठतम सभ्यता है। हम एक थे, एक हैं, और एक रहेंगे। भारतीय दर्शन हमें भारत के साथ-साथ विश्व को प्रदूषण मुक्त करने, अहिंसक बनने, स्वस्थ रहने तथा सभी धर्मों के प्रति सहिष्णु बनने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि हमारा दर्शन केवल पुस्तक का ज्ञान नहीं, बल्कि व्यवहार है। भारत को समझने के लिए भारतीय होना आवश्यक है। उन्होंने सिंधु-सरस्वती संवाद कार्यक्रम आरंभ करने की भी घोषणा की।

राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारतीय दर्शन मजबूत होगा तो ही विश्व को शांति मिलेगी। वेद केवल भारत को ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को राह दिखा रहे हैं। भारत आत्मिक विकास के साथ-साथ विश्व कल्याण व समरसता का संदेश भी देता है।

हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. के.सी. शर्मा ने कहा कि भारतवर्ष का मूल विचार सह-अस्तित्व और विश्व शांति का है। हमारे विचारों और व्यवहार में अंतर नहीं होता। जीजेयू के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने स्वागत संबोधन में कहा कि भारतीय दर्शन हमें सिखाता है कि वह प्रेम और करुणा से ही समाप्त होता है। जब पूरा विश्व युद्धों और संघर्षों से जूझ रहा है तब भगवान बुद्ध का मध्य मार्ग और करुणा का दर्शन पहले से कही और प्रासंगिक हो गया है। भारतीय दर्शन संत परंपरा में गुरु जंभेश्वर महाराज का योगदान भी अद्वितीय है।

लद्दाख विवि के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने कहा कि मानव सभ्यता वर्तमान समय में बेशक अभूतपूर्व वैज्ञानिक शिखर पर है, इसके बावजूद पूरा विश्व चुनौतियों से जूझ रहा है। विश्व में संघर्ष, हिंसा, पर्यावरणीय संकट और स्थायी शांति का अभाव है। भारतीय चिंतन में इन चुनौतियों का समाधान है।

आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं हिमालय परिवार के पालक रूपेश कुमार ने भी अपने विचार साझा किए। हिमालय परिवार के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष परमजीत सिंह गिल ने आभार व्यक्त किया।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित विवि के कुलपतियों, प्रशासनिक अधिकारियों और वरिष्ठ विचारकों ने भाग लिया, जिनमें सीबीएलयू भिवानी की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी, केंद्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान, लेह के कुलपति प्रो. राजेश रंजन, जीजेयू की प्रथम महिला डा. वंदना बिश्नोई व आईजीयू मीरपुर के पूर्व कुलपति प्रो. जे.पी. यादव शामिल रहे।