भारतीय ज्ञान परंपरा समृद्ध ज्ञान प्रणाली हैः प्रो. सुरेन्द्र कुमार

भारतीय भाषाएं, सांस्कृतिक विरासत एवं ज्ञान परंपरा विषयक रंग कलम इवेंट संपन्न।

भारतीय ज्ञान परंपरा समृद्ध ज्ञान प्रणाली हैः प्रो. सुरेन्द्र कुमार

रोहतक, गिरीश सैनी। भारतीय ज्ञान परंपरा समृद्ध ज्ञान प्रणाली है जो कि जीवन से जुड़े विविध ज्ञान आयामों को समाहित करती है। ज्ञान रूपी अनुभूति को भाषा के माध्यम से जन-मानस तक ले जाने का कार्य होता है। जरूरत है कि भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को जानने-समझने के लिए हम तुलनात्मक, विवेचनात्मक दृष्टि विकसित करें। प्रतिष्ठित विद्वान, महर्षि दयानंद एवं वैदिक अध्ययन केन्द्र के निदेशक प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में आयोजित किए जा रहे साहित्यिक आयोजन रंग कलम के समापन सत्र में ये उद्गार व्यक्त किए। भारतीय भाषाएं, सांस्कृतिक विरासत एवं ज्ञान परंपरा विषयक रंग कलम इवेंट का आज समापन हो गया।

प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशिष्ट व्याख्यान समापन सत्र में दिया। प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने विशेष रूप से समय गणना की भारतीय समृद्ध परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अध्यक्षीय भाषण संस्कृत के नामी विद्वान, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व कुलपति प्रो. अभिराज राजेन्द्र मिश्र ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति पूरे विश्व के ज्ञान का संरक्षण करती है तथा भारतीय ज्ञान में वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता अंतर्निहित है। राष्ट्र की एकता-अखंडता में भारतीय सांस्कृतिक तथा ज्ञान परंपरा के बीज समाहित है, ऐसा उनका कहना था।

बतौर आमंत्रित वक्ता चंडीगढ़ से आए प्रतिष्ठित लेखक डा. गुरप्रीत सिंह ने पंजाबी साहित्य तथा लेखन प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने पंजाबी भाषा में कविता पाठ कर साहित्यिक रचना के महत्व को उकेरा। चंडीगढ़ के लेखक डा. मोहित शर्मा ने अंग्रेजी साहित्य तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के मध्य सेतु सृजित करने की बात कही। भारतीय ज्ञान परंपरा से साहित्यिक सिद्धांत चुनकर अंग्रेजी में लिखे साहित्य का विश्लेषण करने की बात भी उन्होंने कही।

प्रतिष्ठित हरियाणवी लेखक-कवि निदेशक युवा कल्याण डा. जगबीर राठी ने मां बोली हरियाणवी में लेखन की सुखदायी अनुभूति को साझा करते हुए कहा कि जीवन के अनुभवों, विशेष रूप से दर्द-दुख-कष्ट से उपजे अनुभव साहित्य सृजन का रास्ता प्रशस्त करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से लोक साहित्य तथा संस्कृति से जुड़ने की बात रखी।

रंग महोत्सव के संयोजक डीन, स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रणदीप राणा ने कहा कि भारतीय लेखक जैसे कि मुंशी प्रेमचंद, अज्ञेय, आदि की वैश्विक पहचान रही है। विद्यार्थियों को अच्छा साहित्य पढ़ने की आदत डालनी चाहिए तथा लिखित सृजनात्मक अभिव्यक्ति का प्रयास करना चाहिए, ऐसा उन्होंने कहा।

संस्कृत विभागाध्यक्षा तथा रंग कलम संयोजिका डा. सुनीता सैनी ने आभार ज्ञापित किया। डा. सुनीता ने कहा कि रंग कलम इवेंट में प्रतिष्ठित लेखकों, नवोदित रचनाकार, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों, साहित्य प्रेमियों ने भाग लेकर इस आयोजन को सफल बनाया। अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर डा. मंजीत राठी ने कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में मंच संचालन निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी ने किया।

पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार, संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डा. श्रीभगवान, डा. रवि प्रभात, डा. सुषमा नारा, प्रो. बलबीर आचार्य, हिन्दी विभाग से डा. कृष्णा देवी तथा डा. अनिल कुमार, अंग्रेजी विभाग से प्रो. सुधीर कुमार, सेवानिवृत्त प्राचार्य एसजेड नकवी, प्रतिष्ठित लेखक मधुकांत, शामनाथ कौशल, दयानंद कादयान, पवन गहलोत, शोधार्थी, विद्यार्थी इस दौरान मौजूद रहे।