एआई के दौर में हुनर ही पहचान, विशेषज्ञता के बिना पिछड़ेंगे फिल्मकार: लामा

सुपवा में छात्रों ने सीखी फिल्म लेखन, निर्देशन और निर्माण की बारीकियां।

एआई के दौर में हुनर ही पहचान, विशेषज्ञता के बिना पिछड़ेंगे फिल्मकार: लामा

रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा) में बुधवार को फिल्म एवं टेलीविजन फैकल्टी के विद्यार्थियों के लिए फिल्म निर्माता-निर्देशक आकाशादित्य लामा की मास्टर क्लास आयोजित हुई। लामा ने छात्रों से बॉलीवुड में अपने रचनात्मक अनुभव साझा करते हुए फिल्म लेखन, निर्देशन और निर्माण की बारीकियां समझाई।

लामा ने कहा कि एआई के दौर में एक्टर, निर्देशक, लेखक, सिनेमेटोग्राफर और डिजाइनर को अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि अच्छी फिल्म की नींव मजबूत कहानी और पटकथा पर टिकी होती है। निर्देशक के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ कहानी, पात्रों और उनके भावनात्मक संसार की समझ भी जरूरी है।

उन्होंने छात्रों को आसपास के सामाजिक परिवेश, लोगों और घटनाओं को बारीकी से देखने की सलाह दी। पटकथा लेखन पर उन्होंने कहा कि यह केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि फिल्म की दृश्य भाषा और भावनात्मक यात्रा का आधार है। निर्देशन में अभिनेता और तकनीकी टीम के साथ प्रभावी संवाद को भी उन्होंने अहम बताया।

लामा ने कहा कि फिल्म निर्माण सामूहिक कला है और निर्देशक को विभिन्न विभागों की क्षमताओं को एक साझा दृष्टि से जोड़ना होता है। थिएटर के अनुभव को उपयोगी बताते हुए उन्होंने संवाद, अभिनय और मंचीय अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला।

कुलपति डॉ. अमित आर्य ने लामा का स्वागत किया। इस दौरान नेशनल अवॉर्डी फिल्म निर्माता-निर्देशक अतुल गंगवार, कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक मनोचा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। लामा ने गदर-एक प्रेम कथा में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर करियर शुरू किया था।