दूसरे विश्व युद्ध से इमरजेंसी तक इतिहास का पोस्ट मार्टम करता उपन्यास "हिंदुस्तानी मेमने"
इतिहास को फिर से खंगालने की कामयाब कोशिश
रविवार (7 जून, 2026) की शाम 7 बजे अटूट बंधन के सोशल मीडिया पेज पर डॉ अजय शर्मा (जालंधर, पंजाब) द्वारा रचित हिंदी उपन्यास `हिंदुस्तानी मेमने' पर चर्चा हुई । डॉ भावना शेखर ने कहा, "यह एक ऐसी पुस्तक है, जिसमें आज़ाद हिन्द फौज के उदय और विलय का इतिहास पढ़ने को मिलता है। यही नहीं इमरजेंसी के काले दौर की कुछ घटनाएं हमें झकझोर देती हैं।" डा उर्मिल शुक्ल ने कहा कि युद्ध की विभीषिका, भारत के विभाजन का दर्द को उपन्यास में बखूबी पेश किया गया है। मंच संचालक शिवानी ने बताया देश की तत्कालीन परिस्थितियों पर चिंतन-मंथन के साथ के साथ तीन दोस्तों की करूण गाथा भी है। डा सुनीता ने कहा कि चार दशक की पीड़ा को उपन्यास में दर्ज किया गया है। प्रेम विज ने कहा कि उपन्यास सम्राट अजय शर्मा जी ने घटनाओं को निष्पक्षता से इतने ब्योरेवार रखा है, जिन्हें इतिहास की जानकारी नहीं है, उनके लिए बहुत कुछ जानने समझने का अवसर भी है। वंदना बाजपेयी ने कहा कि यूँ “गड़े मुर्दे उखाड़ना” कहावत नकारात्मक रूप से ली जाती है। परंतु इतिहास के संदर्भ में ये पूरा सच नहीं हैं। हमारा वर्तमान सदैव इतिहास से ही आकार लेता है। ऐसे में ये उपन्यास इतिहास से कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है, जिनकी बुनियाद पर स्वतंत्र भारत ने आकार लिया। डा अजय शर्मा ने बताया कि उपन्यास उन सवालों के जवाब ढूंढने का प्रयास है, जिन्हें या तो गलत तरह से लिखा गया या फिर बताया नहीं गया। उपन्यास का हर पन्ना राष्ट्र सर्वोपरि घटनाओं से लबरेज है।
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