एमडीयू में पेपर माशे तकनीक से उभरेगी हरियाणवी लोककला
200 किलो रद्दी कागज से बनेगा भव्य म्यूरल, 30 विद्यार्थी जुटे
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू का दृश्य कला विभाग रद्दी कागज को कलाकृति में बदलकर हरियाणवी लोककला और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नया स्वरूप देने में जुटा है। पेपर माशे तकनीक से तैयार होने वाले इस भव्य इनडोर म्यूरल में करीब 200 किलोग्राम रद्दी कागज का इस्तेमाल किया जाएगा।
विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने बताया कि कागज की लुगदी में गोंद, मुल्तानी मिट्टी, ग्वार, इमली के बीजों से तैयार प्राकृतिक सामग्री और ग्वारपाठा मिलाकर उसे मजबूती दी जाएगी। निर्माण के दौरान ही लाल, नीले और पीले रंगों को मिश्रण में शामिल करने की योजना है।
म्यूरल के लिए करीब दो-दो फुट के वृत्ताकार पैनल तैयार किए जाएंगे। इनमें हरियाणवी लोककला, पारंपरिक भारतीय कलाओं और सांस्कृतिक प्रतीकों से प्रेरित आकृतियां उकेरी जाएंगी। बाद में सभी पैनलों को जोड़कर कलात्मक संरचना बनाई जाएगी।
डॉ. संजय कुमार के मार्गदर्शन में बीएफए तृतीय वर्ष के 30 विद्यार्थी इस परियोजना पर काम कर रहे हैं। विभाग का लक्ष्य एक माह में म्यूरल तैयार करना है। पहल से विद्यार्थियों को सामूहिक कला-सृजन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और पुनर्चक्रण के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाएगा।

Girish Saini

