आधुनिक कृषि तकनीक से फसल अवशेष प्रबंधन में हरियाणा ने हासिल किए बेहतर परिणामः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

पराली जलाएं नहीं, खेत में ही खपाएं; सुपर सीडर से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरा शक्ति।

आधुनिक कृषि तकनीक से फसल अवशेष प्रबंधन में हरियाणा ने हासिल किए बेहतर परिणामः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

नीलोखेड़ी, गिरीश सैनी। हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा है कि फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में ही प्रबंधित कर उन्हें मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन बनाया जा सकता है। आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से पराली प्रबंधन के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में भी मदद मिलती है। वे मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित कृषि उपकरण सत्यापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

इस दौरान नीलोखेड़ी खंड के विभिन्न गांवों के किसानों द्वारा सरकारी योजना के तहत खरीदे गए सुपर सीडर उपकरणों का अधिकारियों की समिति ने निरीक्षण और सत्यापन किया। डॉ. चौहान ने कहा कि बदलती कृषि परिस्थितियों में किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ नई तकनीक से जोड़ना जरूरी है। केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि किसानों को मौके पर तकनीक का प्रदर्शन कर उसकी उपयोगिता समझाना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। करनाल समेत राज्य के अधिकांश जिलों में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। किसानों को अवशेष जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों से उनका प्रबंधन करना चाहिए।

करनाल के कृषि उपनिदेशक डॉ. जोगेंद्र सैनी ने बताया कि सुपर सीडर बुआई के दौरान पराली को मिट्टी में मिलाने में मदद करता है। इससे फसल अवशेषों का प्रबंधन होने के साथ मिट्टी में जैविक तत्वों की उपलब्धता और उर्वरा शक्ति बढ़ाने में सहायता मिलती है।