हर देहरी पर दीप जले
प्रेम विज
गरीब के घर भी दीप जले,
अमीर के घर भी दीप जले,
हिंदू के घर भी दीप जले,
सिख के घर भी दीप जले,
हर देहरी पर दीप जले।
मज़हब की दीवारें टूटें,
नफ़रत के अँधियारे छूटें,
प्रेम की ऐसी ज्योति जले,
हर आँगन में खुशियाँ फूलें।
मंदिर में भी दीप जले,
मस्जिद के आँगन दीप जले,
गुरुद्वारे में ज्योति जले,
हर देहरी पर दीप जले।
फौजी के घर भी दीप जले,
किसान के घर भी दीप जले,
धोबी के घर भी दीप जले,
मोची के घर भी दीप जले,
मज़दूर के घर भी दीप जले।
किसान के घर खुशहाली हो,
बेटी के चेहरे पर लाली हो,
बूढ़ी आँखों में चमक रहे,
हर माँ के मन में आस जगे।
बच्चों के सपने साकार हों,
हर घर में सुख के द्वार खुलें,
भूखे को रोटी मिल जाए,
प्यासे को पानी मिल जाए।
न ऊँच-नीच का भेद रहे,
न जाति-धर्म का खेद रहे,
इंसान से इंसान मिले,
हर दिल में सद्भावना खिले।
जिस घर में वर्षों से अँधेरा,
उस घर में भी उजियारा हो,
जिसके हिस्से में दुख आया,
उसका भी पर्व हमारा हो।
सीमा पर जो प्रहरी जागे,
उसके घर भी त्योहार मने,
जो देश की रक्षा में जुटा,
उसके आँगन में दीप जले।
दीप जलें तो ऐसे जलें,
हर मन का अँधियारा हरें,
केवल घर ही नहीं रोशन हों,
इंसान के हृदय में उजियारा करें।
आओ मिलकर प्रण ये करें,
कोई न अँधियारे में रहे,
खुशियों का अधिकार मिले,
हर चेहरे पर मुस्कान खिले।
गरीब के घर भी दीप जले,
अमीर के घर भी दीप जले,
हर धर्म के घर दीप जले,
हर देहरी पर दीप जले।
यही दिवाली का संदेश रहे,
हर दिल में प्रेम का वास रहे,
जब तक धरती पर जीवन है,
हर देहरी पर दीप जले!
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1284 सैक्टर 37बी
चंडीगढ़ -160036

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