हास्य व्यंग्य संग्रह 'आधी इज्जत पूरी बेइज्जती' का हुआ लोकार्पण और चर्चा

हास्य व्यंग्य संग्रह 'आधी इज्जत पूरी बेइज्जती' का हुआ लोकार्पण और चर्चा

चंडीगढ़: कहानीकार, व्यंग्यकार अश्वनी मल्होत्रा 'भीम' की हास्य व्यंग्य पुस्तक 'आधी इज्जत पूरी बेइज्जती' का  आज लोकार्पण और चर्चा समारोह चंडीगढ़ प्रैस क्लब, सेक्टर 27 में श्रोताओं के हंसी ठहाकों और तालियों की गड़गड़ाहट में किया गया। वरिष्ठ कवि व रंगकर्मी विजय कपूर ने मंच का संचालन अपने अनोखे अंदाज में किया।
कार्यक्रम का आरम्भ पुस्तक पर पर्चा पढ़ने वालों प्रेम विज, नवनीत बख्शी, अन्नुरानी शर्मा और विजय कपूर को शाल दे कर सम्मानित कर किया गया।
लोकार्पण के पश्चात पुस्तक पर विचार प्रस्तुत करते हुए कवयित्री और समालोचक अन्नूरानी शर्मा ने कहा कि रसोई से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक के फलक को समेटे यह संग्रह आधुनिक जीवन की हर विसंगति को बेनकाब करता है। हरिशंकर परसाई के वैचारिक अंदाज को आत्मसात करते हुए यह कृति श्रेष्ठ व्यंग्यकारों की परंपरा को जीवंत करती है ।
उसके पश्चात कवि, कहानीकार नवनीत बख्शी ने कहा कि मेरे लिए व्यंग्य की असली पहचान यही है—पढ़ते हुए पहले किसी और की शक्ल दिखाई दे और थोड़ी देर बाद अपनी भी दिखने लगे। भीम जी की कई रचनाएँ ऐसा मौका देती हैं। ‘हमारा जन्मसिद्ध अधिकार’ में वे बिना माँगे सलाह देने वालों की खबर लेते हैं।
तत्पश्चात वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज पुस्तक पर बोले कि पुस्तक के संवादों में ऐसी व्यंग्य की धार है कि पाठक को ऐसा लगता है कि जैसे वह साहित्यिक मंच से लेखक को रचना सुनते हुए सुन रहा है।
उसके बाद पुस्तक पर अपने  विचार प्रकट करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं रंगकर्मी विजय कपूर ने कहा, " विडंबनाओं से घिरे समकालीन समाज, राजनीति और मानवीय रिश्तों की परतें उधेड़ता अश्वनी मल्होत्रा 'भीम' का व्यंग्य-संग्रह 'आधी इज्ज़त पूरी बेइज्ज़ती' एक अचूक प्रहार है। इसकी व्यंग्य-रेखाएँ सतही उपहास नहीं रचतीं, बल्कि हँसी के पर्दे के पीछे छिपे यथार्थ से रूबरू कराकर गहरी आत्म-पड़ताल की अग्नि में तपाने का सामर्थ्य रखती हैं।
पुस्तक के लेखक अश्वनी मल्होत्रा 'भीम' ने अपनी पुस्तक के लेखन बारे अपने  विचार पाठकों के साथ साझा किए ।
लेखक के लिखे गीत को सुदर्शन पाहवा ने गा कर कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे।