खुशहाल विद्यार्थी ही बेहतर समाज की नींवः प्रो. दीप्ति हुड्डा
गुरु दक्षता कार्यक्रम में सकारात्मक युवा विकास और एआई आधारित शिक्षण पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) के फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा संचालित गुरु दक्षता फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. दीप्ति हुड्डा ने विद्यार्थियों की खुशहाली और सकारात्मक विकास को शिक्षा का मूल आधार बताते हुए कहा कि खुशहाल विद्यार्थी ही बेहतर समाज की मजबूत नींव बनते हैं। उन्होंने शिक्षकों से ऐसा सकारात्मक और संवेदनशील शैक्षणिक वातावरण तैयार करने का आह्वान किया, जो विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और समग्र विकास को बढ़ावा दे।
प्रो. दीप्ति हुड्डा ने एम्पॉवरिंग टीचर्स टू कल्टीवेट हैप्पीनेस फॉर पॉजिटिव यूथ डेवलपमेंट विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान और कौशल तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के भावनात्मक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विकास को भी समान महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक उपलब्धियां जीवन का एक पक्ष हैं, लेकिन स्थायी खुशी सकारात्मक संबंधों, कृतज्ञता, करुणा और सकारात्मक दृष्टिकोण से प्राप्त होती है। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों की खुशहाली आधारित शिक्षा मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रातः कालीन सत्र में शिक्षाविद् एवं शैक्षिक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ प्रो. आर.सी. शर्मा ने एआई टूल्स फॉर लर्नर इंगेजमेंट विषय पर व्याख्यान देते हुए उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीकें शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, व्यक्तिगत और सहभागितापूर्ण बना रही हैं। उन्होंने गूगल जेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट को-पायलट, वोल्फ्राम अल्फा, नैपकिन एआई, ग्रामरली और कनेक्टेड पेपर्स जैसे डिजिटल टूल्स का व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए बताया कि शोध लेखन, साहित्य समीक्षा, प्रस्तुतीकरण निर्माण और शिक्षण सामग्री विकास में इनका उपयोग शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।
उपनिदेशिका डॉ. माधुरी हुड्डा ने कहा कि एनईपी -2020 के अनुरूप शिक्षकों के लिए तकनीकी दक्षता और मानवीय संवेदनशीलता का संतुलन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित नवाचारों के साथ विद्यार्थियों की खुशहाली और मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित शिक्षा ही भविष्य की शिक्षा को अधिक प्रभावी और सार्थक बनाएगी।
Girish Saini 

