खुश रहना ही असली सफलता, जिंदगी का रिमोट न दें किसी और कोः प्रो. केजी सुरेश

एमडीयू के दीक्षारंभ-2026 में पीजी छात्रों को दिया सफलता का मंत्र; कुलपति बोले- नौकरी खोजने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें।

खुश रहना ही असली सफलता, जिंदगी का रिमोट न दें किसी और कोः प्रो. केजी सुरेश

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के टैगोर ऑडिटोरियम में वीरवार को नव प्रवेशित स्नातकोत्तर (पीजी) विद्यार्थियों के स्वागत के लिए दीक्षारंभ-2026 ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। बतौर मुख्य वक्ता, इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने विद्यार्थियों को जीवन में सफलता और खुशी का मंत्र देते हुए कहा कि यह जीवन आपका है, इसलिए इसका रिमोट कंट्रोल कभी किसी दूसरे के हाथ में न सौंपें। उन्होंने कहा कि जीवन का मूल उद्देश्य खुश रहना है और ऐसी सफलता का कोई अर्थ नहीं, जो व्यक्ति को आत्मिक खुशी न दे।

प्रो. सुरेश ने विद्यार्थियों को भौतिकवाद की अंधी दौड़ से बचने और दूसरों से नहीं, बल्कि खुद से मुकाबला करने की सीख दी। उन्होंने समय की अहमियत समझाते हुए कहा कि बीता कल कैंसल हो चुका चेक है, आने वाला कल प्रॉमिसरी नोट और वर्तमान समय ही नगद कैश है। इसलिए युवाओं को वर्तमान का सही इस्तेमाल करते हुए निरंतर सीखने, आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बनने, सवाल पूछने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए रिसर्च, इनोवेशन और विज्ञान बेहद जरूरी हैं। विद्यार्थियों को लाइब्रेरी में अध्ययन की परंपरा को फिर से मजबूत करना चाहिए।

कुलपति ने कहा कि विकसित भारत का सपना युवाओं के कंधों पर है। विद्यार्थी केवल नौकरी तलाशने वाले न बनें, बल्कि स्टार्टअप और नवाचार के जरिए रोजगार सृजक बनें। उन्होंने युवाओं से विज्ञान और तकनीक के माध्यम से समाज की बुनियादी समस्याओं के समाधान खोजने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में तकनीकी ज्ञान के साथ सोशल और इमोशनल इंटेलिजेंस भी जरूरी है।

प्रख्यात चिकित्सक एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रो. योगेंद्र मलिक ने चरित्र से नेतृत्व तकः महापुरुषों से विद्यार्थियों की सीख विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने सर छोटूराम, भगत फूल सिंह, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और डॉ. बीआर आंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों से व्यसनों से दूर रहकर लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।

आर.वी. यूनिवर्सिटी बेंगलुरु की डायरेक्टर (कैंपस प्लेसमेंट) एवं एमडीयू की पूर्व छात्रा डॉ. किट्टी मुखर्जी ने विद्यार्थियों को बेहतर संचार और जीवन कौशल विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से ज्ञानवर्धन के लिए लाइब्रेरी का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया। परीक्षा नियंत्रक प्रो. राहुल ऋषि ने विवि की परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया की जानकारी दी।

इससे पहले डीएसडब्ल्यू प्रो. सपना गर्ग ने अतिथियों का स्वागत किया और डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. रणदीप राणा ने आभार जताया। मंच संचालन प्रो. दिव्या मल्हान, डॉ. बिंदु अहलावत और निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी ने किया। प्रातःकालीन सत्र में योग सत्र हुआ। इसके बाद मातूराम यज्ञशाला में वैदिक रीति से यज्ञ किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षक और बड़ी संख्या में पीजी विद्यार्थी मौजूद रहे।