जीएनडीयू के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील का भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में बतौर 'एसोसिएट फेलो' चयन

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील का चयन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अंतर-विश्वविद्यालय मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान केंद्र (IUC-HSS) के अंतर्गत भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में हिंदी विषय में बतौर 'एसोसिएट फेलो' हुआ है।

जीएनडीयू के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील का भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में बतौर 'एसोसिएट फेलो' चयन

  अमृतसर, 8 अक्टूबर, 2026: गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील का चयन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अंतर-विश्वविद्यालय मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान केंद्र (IUC-HSS) के अंतर्गत भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में हिंदी विषय में बतौर 'एसोसिएट फेलो' हुआ है। वे आगामी तीन वर्षों तक समय-समय पर भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में रहकर अपना विशिष्ट शोध-कार्य करेंगे।यह संस्थान भारतीय एवं वैश्विक ज्ञान-परंपराओं, मानविकी तथा सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्चस्तरीय अंतर्विषयक अध्ययन और शोध के लिए प्रतिष्ठित है।यह उपलब्धि हिन्दी भाषा एवं साहित्य के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक शोध, अकादमिक सक्रियता और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की महत्वपूर्ण स्वीकृति मानी जा रही है। ऐसे संस्थान से जुड़ना किसी भी अध्येता के लिए महत्वपूर्ण अकादमिक उपलब्धि माना जाता है।
गौरतलब है कि प्रो. सुनील  हिंदी-साहित्य के अधीती विद्वान हैं। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध/साहित्यिक पत्रिकाओं एवं जर्नल्स में अभी तक इनके लगभग 150 शोध-प्रपत्र और आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। सर्जनात्मक लेखन के रूप में भी लेख- प्रलेख समाचार-पत्र, पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं। इनके कुशल शोध-निर्देशन में अभी तक 14 शोधार्थी पीएच.डी. और 48 शोधार्थी एम.फिल. की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। दूरदर्शन और आकाशवाणी के कार्यक्रमों में भी इनका निरंतर जुड़ाव रहता है। अभी तक प्रो. सुनील की 9 महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं में सक्रिय भागीदारी रखते हैं। विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 120 से अधिक विस्तार-भाषण दे चुके हैं। ये अभी तक लगभग 50 बड़ी साहित्यिक गतिविधियों का सफलतापूर्वक आयोजन कर चुके हैं। इनके साहित्यिक, शोध परक और  सामाजिक अवदान के लिए अनेक मान-सम्मान एवं पुरस्कार मिल चुके हैं। प्रो. सुनील बतौर मूल्यांकन कर्ता / परीक्षक / पर्यवेक्षक और परामर्शदाता कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों से जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय महत्व की अनेक संस्थाओं व मंचों के पदेन सदस्य हैं। 
भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्यबोध, संस्कृति-बोध और राष्ट्रबोध प्रो. सुनील की साहित्यिक चेतना के प्रमुख केंद्र-बिंदु हैं। इनकी लेखनी और संभाषणों का मूल उद्देश्य समाज एवं राष्ट्र का निर्माण है। नैतिक मूल्यों की स्थापना, मानवीय संवेदनाओं का विकास तथा चरित्रोत्थान के माध्यम से स्वस्थ, संस्कारित और उत्तरदायी समाज का निर्माण इनकी साहित्यिक साधना का ध्येय है।
प्रो. सुनील ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के माननीय उप-कुलपति प्रो. करमजीत सिंह का विशेष तौर पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सुयोग्य नेतृत्व, सतत प्रेरणा, उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण और समुचित प्रोत्साहन-मार्गदर्शन के बलबूते विश्वविद्यालय निरंतर नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।  इस अवसर पर साहित्य जगत की अनेक नामचीन हस्तियों ने प्रो. सुनील को बधाई दे हुए पंजाब प्रांत में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए उनके बहुमूल्य प्रयासों की सराहना की है। उनके परिजनों, सहकर्मियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं साहित्यिक-सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इस उपलब्धि को हिन्दी शोध की प्रतिष्ठा और भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन को मिली नई ऊर्जा के रूप में देखा है।