पाइरान-थियो हेटेरोसाइक्लिक फ्रेमवर्क पर शोध के लिए जीजेयू की प्रो. अर्चना कपूर को मिली 28 लाख रुपये की शोध परियोजना

पाइरान-थियो हेटेरोसाइक्लिक फ्रेमवर्क पर शोध के लिए जीजेयू की प्रो. अर्चना कपूर को मिली 28 लाख रुपये की शोध परियोजना

हिसार, गिरीश सैनी। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि में ग्रीन केमिस्ट्री के साथ कम्प्यूटेशनल तरीकों को मिलाकर, पारंपरिक ड्रग डिस्कवरी में लगने वाले समय और लागत को कम करने तथा सुरक्षित और असरदार एंटी-डायबिटिक कंपाउंड की पहचान को बेहतर बनाने पर शोध करने के लिए फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग की प्रो. अर्चना कपूर को शोध परियोजना मिली है। इस शोध परियोजना का विषय -सतत तरीके से एसजीएलटी-2 को टारगेट करने के लिए पाइरान-थियो हेटेरोसाइक्लिक फ्रेमवर्क है। हरियाणा राज्य अनुसंधान कोष (एचएसआरएफ) से इस दो वर्षीय शोध परियोजना को ₹28.00 लाख की मंजूरी मिली है।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि यह शोध फार्मास्युटिकल के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी होगा। साथ ही समाज व राष्ट्र निर्माण में भी योगदान देगा। यह परियोजना हरियाणा राज्य में फार्मास्युटिकल शोध को मजबूत करेगी तथा डायबिटीज के लिए किफायती इलाज विकसित करने में भी योगदान देगी। उन्होंने प्रो. अर्चना कपूर व उनकी शोध टीम को इस परियोजना के मिलने पर बधाई दी।

प्रो. अर्चना कपूर ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस के इलाज के लिए संभावित एसजीएलटी-2 इनहिबिटर के तौर पर ग्रीन-सिंथेसाइज्ड पाइरान-युक्त डेरिवेटिव विकसित करना है। इस परियोजना में लैब में सिंथेसिस और बायोलॉजिकल मूल्यांकन से पहले सबसे अच्छे ड्रग कैंडिडेट की पहचान करने के लिए कम्प्यूटेशनल स्टडीज (जैसे वर्चुअल स्क्रीनिंग, मॉलिक्यूलर डॉकिंग, एडीएमईटी प्रेडिक्शन और अन्य इन-सिलिको तकनीकें) का इस्तेमाल किया जाएगा।