एफटीवी के छात्र सीख रहे फिल्मों के सेट बनाने का हुनर
कार्यशाला में बॉलीवुड के प्रोडक्शन डिजाइनर राहुल सिखा रहे बारीकियां।
रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक के फिल्म एवं टेलीविजन फैकल्टी में आयोजित कार्यशाला में बॉलीवुड के प्रोडक्शन डिजाइनर राहुल बाला छात्रों को फिल्मों के सेट तैयार करने की विधा सिखा रहे हैं। इस दौरान वे सेट तैयार करने के दौरान ध्यान रखी जाने वाली बारीकियां छात्रों से साझा कर रहे हैं।
फिल्म एवं टेलीविजन फैकेल्टी के एफसी महेश टीपी ने बताया कि राहुल बाला एफटीआईआई, पुणे और कॉलेज ऑफ आर्ट, दिल्ली से फोटोग्राफी व प्रॉडक्शन डिजाइन में प्रशिक्षित हैं। वे सोहम शाह फिल्मस् की चमकीला, स्टेज ओटीटी की वेब सीरीज अखाड़ा, इम्तियाज अली द्वारा प्रस्तुत और जीना अभी बाकी है, में प्रोडक्शन डिजाइनर के तौर पर कार्य कर चुके हैं। एनडीएफएफ 2021 में सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी पुरस्कार हासिल करने वाली बच्चों की शॉर्ट फिल्म दूरबीन का सह-निर्माण और शूट भी उन्होंने ही किया था।
कुलपति डॉ अमित आर्य ने कहा कि फिल्मों में दिखने वाली भव्यता सिर्फ कलाकारों या लोकेशन की देन नहीं होती, बल्कि उसके पीछे एक पूरी टीम की महीनों की मेहनत छिपी होती है। जब भी आप किसी ऐतिहासिक या भव्य फिल्म को देखते हैं तो उसके सेट आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। लेकिन यह जादू अचानक नहीं बनता, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित और बेहद तकनीकी प्रक्रिया होती है। इसी में विवि के छात्रों को पारंगत करने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
बॉलीवुड के प्रोडक्शन डिजाइनर राहुल बाला ने कार्यशाला के दौरान छात्रों को बताया कि फिल्म का सेट तैयार करने की जिम्मेदारी प्रोडक्शन डिजाइनर व आर्ट डायरेक्टर की होती है, जो निर्देशक के विजन को समझकर पहले ब्लूप्रिंट तैयार करते हैं। इसमें हर छोटी-बड़ी डिटेल शामिल होती है, जैसे महल का आकार, दरवाजों की डिजाइन, रंगों का संयोजन और यहां तक कि दीवारों की बनावट कैसी रहेगी। इसके बाद लकड़ी, फाइबर, प्लास्टर और अन्य विशेष सामग्री की मदद से सेट को धीरे-धीरे खड़ा किया जाता है। कई बार सेट इतने वास्तविक बनाए जाते हैं कि दर्शक उन्हें असली लोकेशन समझ बैठते हैं। उन्होंने कहा कि सिनेमा एक विजुअल आर्ट है, जहां हर फ्रेम को खास बनाने के लिए बारीकी से काम किया जाता है। यही वजह है कि जब दर्शक इन सेट में शूट हुई फिल्मों को देखते हैं तो उन्हें सिर्फ कहानी ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक याद रहने वाला एक भव्य अनुभव भी मिलता है।

Girish Saini 

