पूर्व कुलपति विवेक चंद शर्मा पंचतत्व में विलीन

पूर्व कुलपति विवेक चंद शर्मा पंचतत्व में विलीन

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के पूर्व कुलपति विवेक चंद शर्मा का पार्थिव शरीर शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गया। गत रात्रि विवेक चंद शर्मा का निधन हुआ था।

झज्जर में उनके अंतिम संस्कार में ज्येष्ठ पुत्र प्रो. प्रवीण शर्मा (जीजेयू, हिसार) ने मुखाग्नि दी। उनकी अंतिम यात्रा में शिक्षाविदों सहित राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए। एमडीयू के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. ए.एस. मान, आईजीयू (मीरपुर) के पूर्व कुलपति प्रो. जे.पी. यादव, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शिव रमण गौड़, निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी, हरियाणा पर्यटन निगम के पूर्व चेयरमैन चक्रवर्ती शर्मा, प्रो राजेश पूनिया, प्रो. प्रमोद भारद्वाज, एमडीयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ प्रधान सुरेश शर्मा, पूर्व प्रधान ईश्वर शर्मा, फूल कुमार बोहत, राजकुमार शर्मा, प्रो. अनिल छिल्लर, प्रो संतोष तिवारी, डॉ. मुकेश, राजकीय महाविद्यालय झज्जर के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डी डी शर्मा, रवि किरण मदान, पूर्व प्राचार्य एस.एस. यादव, गौड़ ब्राह्मण संस्था के पूर्व प्रधान रामकरण अत्री, डॉ. कृष्ण कुमार समेत अन्य प्रबुद्ध जन शव यात्रा में शामिल हुए। उपस्थित जन ने शोक संतप्त परिजनों - धर्मपत्नी शकुंतला शर्मा, पुत्र प्रो. प्रवीण शर्मा एवं नवीन शर्मा, पुत्री प्रो. मीनाक्षी वशिष्ठ, दामाद प्रो. मदन गोपाल वशिष्ठ, भांजा सुधांशु दत्त आदि से हार्दिक संवेदनाएं प्रकट की।

21 जनवरी 1939 में जन्मे विवेक चंद शर्मा प्रतिष्ठित शिक्षाविद् थे। वे हरियाणा कॉलेज काडर में जूलॉजी के प्राध्यापक रहे। एमडीयू में कुलपति पद पर नियुक्ति से पूर्व वे 5 अगस्त 1991 से 17 जुलाई 1993 तक राजकीय पीजी नेहरू कॉलेज, झज्जर में प्राचार्य पद पर कार्यरत रहे। तदुपरांत, जुलाई 1993 से फरवरी 1994 तक वे एमडीयू में प्रो वाइस चांसलर पद पर कार्यरत रहे। 23 फरवरी 1994 से 21 नवंबर 1996 तक वे एमडीयू के कुलपति पद पर कार्यरत रहे।

एमडीयू में विवेक चंद शर्मा का कार्यकाल उनके द्वारा परीक्षा व्यवस्था में किए गए व्यापक सुधार के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में परीक्षा के दौरान नकल की प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार करते हुए नकेल कसी। विवि कैंपस, विशेष रूप से बॉयज हॉस्टल्स में, अनुशासनहीनता पर लगाम लगाई। हॉस्टलों में अनधिकृत रूप से रह रहे बाहरी तत्वों को बाहर का रास्ता दिखाया गया। 

शैक्षणिक क्षेत्र में उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक गोष्ठियों तथा सम्मेलनों का आयोजन किया गया। विवि का छठा दीक्षांत समारोह उनके कार्यकाल में 26 मार्च 1995 को आयोजित किया गया जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय न्यायमूर्ति ए.एम. अहमदी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।

उल्लेखनीय है कि उनकी सुपुत्री प्रो. मीनाक्षी वशिष्ठ एमडीयू के जेनेटिक्स विभाग में प्रोफेसर है और वर्तमान में डीन, फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंस के तौर पर कार्यरत है।