अपराध की गुत्थी सुलझाने में फोरेंसिक साक्ष्य अहम: एमडीयू में विशेषज्ञों ने समझाई आधुनिक तकनीकें
रोहतक, गिरीश सैनी। अपराध की गुत्थी सुलझाने और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में वैज्ञानिक साक्ष्य निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसी महत्व से विद्यार्थियों को रूबरू कराने के लिए एमडीयू के विधि एवं फोरेंसिक विज्ञान विभाग ने बुधवार को डॉ. बीआर अंबेडकर हॉल में फोरेंसिक केस स्टडीज एवं उभरती फोरेंसिक तकनीकें विषय पर इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया।
डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणदीप राणा मुख्य अतिथि और कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल विशिष्ट अतिथि रहे। क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, सुनारिया के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को अपराध स्थल से साक्ष्य जुटाने, दस्तावेजों की वैज्ञानिक जांच और फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी की उपयोगिता समझाई।
सीन ऑफ क्राइम, रोहतक की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. सरोज दहिया ने अपराध स्थल पर प्रारंभिक कार्रवाई और साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया बताई। वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी श्रवण कुमार ने दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच, जबकि ज्योति मलिक ने विष विज्ञान संबंधी तकनीकों की जानकारी दी। केस स्टडीज के जरिए विद्यार्थियों को जांच की व्यावहारिक बारीकियों से परिचित कराया गया।
प्रो. रणदीप राणा और प्रो. संदीप बंसल ने कहा कि विधि एवं विज्ञान का समन्वय जटिल आपराधिक मामलों की जांच और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता मजबूत करने के लिए जरूरी है।

Girish Saini

