पराली जली तो होगी एफआईआर, लाल एंट्री से रुकेगा योजनाओं का लाभ
डीसी सतबीर सिंह ने 147 गांवों में निगरानी समितियों को सक्रिय रखने के दिए निर्देश
रोहतक, गिरीश सैनी। धान कटाई के बाद फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। उपायुक्त सतबीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में पराली जलाने की एक भी घटना न हो और गांव स्तर पर गठित निगरानी समितियां पूरी तरह सक्रिय रहें।
लघु सचिवालय में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद डीसी ने कहा कि सभी 147 गांवों में गठित टीमें खेतों और मुख्य राजमार्गों के आसपास निगरानी करेंगी। गांव स्तर के नोडल अधिकारी पराली जलाने की सूचना तत्काल प्रशासन को देंगे।
उपायुक्त ने बताया कि पिछले वर्ष दर्ज 53 मामलों में केवल नौ घटनाएं सही पाई गई थीं। इस वर्ष मेरी फसल-मेरा ब्यौरा में दर्ज मिसमैच आंकड़ों की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की पुष्टि होने पर एफआईआर के साथ जुर्माना लगाया जाएगा और संबंधित किसान के किला नंबर की पोर्टल पर लाल एंट्री की जाएगी। इसके बाद किसान को कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा और मंडी में फसल बेचने में भी परेशानी होगी।
उन्होंने धान कटाई वाली हार्वेस्टर मशीनों में एसएमएस लगाना अनिवार्य बताया। केवल एसएमएस युक्त हार्वेस्टर ही कटाई कर सकेंगे। कृषि विभाग गांवों में जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को अवशेष प्रबंधन के लिए प्रेरित कर रहा है।
एडीसी नरेंद्र कुमार ने बताया कि खरीफ फसल के पंजीकरण के लिए ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल 27 सितंबर तक खुला है।

Girish Saini 

