युवाओं में बढ़ते हृदय रोग पर विशेषज्ञों ने बजाई खतरे की घंटी, 400 से अधिक हृदय विशेषज्ञों ने क्रिसकॉन में किया मंथन
फास्ट फूड, तनाव और कम व्यायाम को बताया बढ़ता जोखिम; महिलाओं में भी बढ़ रहे मामले
रोहतक, गिरीश सैनी। पीजीआईएमएस, रोहतक में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय हृदय सम्मेलन क्रिसकॉन-2026 में देशभर से पहुंचे 400 से अधिक हृदय विशेषज्ञों ने हृदय रोग की बदलती चुनौतियों, नई उपचार तकनीकों और आपात प्रबंधन पर मंथन किया। सम्मेलन में युवाओं में बढ़ते हृदय रोग को लेकर बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, तनाव और व्यायाम की कमी को प्रमुख चिंताओं में शामिल किया गया।
पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि युवाओं में फास्ट फूड, तले-भुने खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन, कम व्यायाम और नियमित स्वास्थ्य जांच की कमी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में हृदय रोग का जोखिम नहीं होने की धारणा बदलनी होगी। स्कूल स्तर से ही स्वास्थ्य शिक्षा और नियमित जांच पर जोर दिया जाना चाहिए।
पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि ऐसे सम्मेलन चिकित्सकों को उपचार की नई तकनीकों और बदलते चिकित्सा प्रोटोकॉल से अपडेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सम्मेलन में प्रो. एससी श्रीवास्तव ओरेशन आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. संदीप मिश्रा ने द आर्कियोलॉजी ऑफ हार्ट फेलियर विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं, डॉ. वरुण अरोड़ा ने नई दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल और उनके प्रभावों पर जानकारी साझा की।
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी कुमार ने कहा कि देश में कार्डियोलॉजिस्ट की उपलब्धता और आवश्यकता के बीच अंतर है। सम्मेलन में फिजिशियन व बाल रोग विशेषज्ञों को भी हृदय संबंधी आपात स्थितियों की पहचान और प्रारंभिक प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। महिलाओं में बढ़ते हृदय रोग और मधुमेह-किडनी रोग से जुड़े हृदय जोखिम पर भी चर्चा हुई।
कार्डियो-नेफ्रो सत्र में हृदय और किडनी के आपसी संबंध पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। सम्मेलन में पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली समेत कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने सम्मेलन के लिए 8 क्रेडिट घंटे प्रदान किए।

Girish Saini 

