विशेषज्ञ वक्ताओं ने दिए ई-रिसोर्सेज संबंधी विशेष व्याख्यान

विशेषज्ञ वक्ताओं ने दिए ई-रिसोर्सेज संबंधी विशेष व्याख्यान

रोहतक, गिरीश सैनी। ई-संसाधनों का उपयोग कर उच्च शिक्षा तथा शोध क्षेत्र में बेहतर कार्य किया जा सकता है। ई-संसाधनों के उपयोग से ऐतिहासिक दस्तावेज, आर्थिक क्षेत्र के आँकड़े, वैश्विक राजनीतिक इतिहास तथा राजनीति शास्त्र के सैद्धांतिक आयाम, जनसंचार क्षेत्र के लिए उपयोगी स्रोत आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। जरूरत है कि विद्यार्थी, शोधार्थी तथा प्राध्यापक ई-संसाधनों व दस्तावेजों का उपयोग प्रभावी ढंग से करें। एमडीयू के विवेकानंद पुस्तकालय में लेवरेजिंग लाइब्रेरी रिसोर्सेज फॉर इंपैक्टफुल रीडिंग, टीचिंग एण्ड रिसर्च विषयक कार्यशाला में आमंत्रित विशेषज्ञ वक्ताओं ने ई-रिसोर्सेज संबंधित विशेष व्याख्यान देते हुए ये विचार साझा किए।

लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक ने बताया कि एमडीयू के विवेकानंद पुस्तकालय में लगभग एक लाख ई-पुस्तकें, तेरह हजार से अधिक ई-जर्नल्स, 17 डाटा बेस तथा चार रिसर्च टूल्स उपलब्ध हैं। पुस्तकालय में प्रतिष्ठित संस्थानों के ई-संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मंगलवार को सेन्गेज लर्निंग इंडिया लिमिटेड के डिजिटल प्रोडक्ट ट्रेनर अमन शर्मा तथा सेज पब्लिकेशंस की प्रतिनिधि मिक्की मेहता ने विद्यार्थियों को विभिन्न उपयोगी डाटा बेस के बारे में बताया। कार्यशाला का समन्वयन इंफॉर्मेशन साइंटिस्ट डॉ. सुन्दर सिंह ने किया। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो हरीश कुमार ने कार्यशाला में प्रथम सत्र की अध्यक्षता की। इस दौरान पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्राध्यापक सुनित मुख़र्जी तथा डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. सीमा देशवाल विशेष रूप से मौजूद रहे।

कार्यशाला में उन्नीसवीं शताब्दी से संबंधित फोटोग्राफी, मैप्स एंड ट्रैवल लिटरेचर, एशिया एवं पश्चिमी दुनिया, यूरोप, अफ्रीका, साम्राज्यवाद संस्कृति, उपनिवेशवाद, इकोनॉमिस्ट, फाइनेंशियल टाइम्स, भारत से संबंधित 1947 से 1980 तक का ऐतिहासिक तथा सामरिक दस्तावेजों के बारे विस्तार पूर्वक चर्चा हुई। इन संसाधनों का उपयोग उच्च अध्ययन एवं शोध में कैसे किया जाए, विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की। कार्यशाला में इतिहास, राजनीति विज्ञान, पत्रकारिता एवं जनसंचार, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, वाणिज्य तथा अर्थशास्त्र विभाग के शोधार्थी व विद्यार्थी शामिल हुए।