अटल आरआईओ, रोहतक का दौरा करने पहुँची स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की मूल्यांकन टीम
रोहतक, गिरीश सैनी। राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टि क्षीणता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत नेत्र शल्य चिकित्सकों को प्रशिक्षण देने के लिए अटल क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान, रोहतक की तैयारियों का जायजा लेने हेतु स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की तीन सदस्यीय केंद्रीय मूल्यांकन टीम ने वीरवार को पीजीआईएमएस, रोहतक का दौरा किया। इस दौरान टीम ने संस्थान के आधारभूत ढांचे, प्रशिक्षित जनशक्ति, उपकरणों, प्रशिक्षण सुविधाओं और अन्य संबंधित पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की।
अटल क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान के अध्यक्ष डॉ आर.एस. चौहान ने बताया कि केंद्रीय टीम में कार्यक्रम प्रभारी एवं वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. सी. अपर्णा, कंसल्टेंट मेडिकल डॉ. सुरभि यादव तथा कंसल्टेंट मेडिकल डॉ. दीपशिखा शामिल हैं। इस दौरे का उद्देश्य ये आकलन करना है कि क्या अटल आरआईओ, रोहतक राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत नेत्र शल्य चिकित्सकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने में सक्षम है और यहां क्या सुविधाऐं बढ़ाई जा सकती हैं।
पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने इस दौरे को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अटल आरआईओ, रोहतक को हर संभव प्रशासनिक व तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने नेत्र रोग विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए कि केंद्रीय टीम के निर्देशों के अनुसार सभी व्यवस्थाओं को स्ट्रीमलाइन किया जाए और समन्वय व समयबद्धता के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस प्रशासन का पूरा प्रयास रहेगा कि अटल आरआईओ को राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाए, ताकि हरियाणा समेत पूरे उत्तर भारत के नेत्र शल्य चिकित्सकों को यहां उन्नत प्रशिक्षण मिल सके।
डॉ आर.एस. चौहान ने बताया कि केंद्रीय टीम ने अपने दौरे के दौरान कहा कि राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। टीम ने जोर दिया कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व में मिले फंड का समय पर उपयोग सुनिश्चित करने की बात कही।
विभागाध्यक्ष डॉ. आर.एस. चौहान ने केंद्रीय टीम को आश्वस्त किया कि संस्थान के पास पर्याप्त ओटी, आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित फैकल्टी और प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि आरआईओ में पहले से ही पीजी छात्रों व नेत्र शल्य चिकित्सकों को मोतियाबिंद, ग्लूकोमा व रेटिना सर्जरी का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभाग मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी कमियों को दूर करेगा।
इस दौरान वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. डॉ निभा पाशी, डॉ. मनीषा नाडा, डॉ अशोक राठी भी मौजूद रहे। डॉ. मनीषा नाडा ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सामुदायिक नेत्र जांच शिविरों को भी प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा, ताकि फील्ड स्तर पर काम करने वाले सर्जनों को वास्तविक अनुभव मिल सके।
Girish Saini 

