वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 28वीं बैठक में मिट्टी-पानी की लवणता, जलभराव व प्राकृतिक खेती पर प्रदर्शन लगाने पर जोर

वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 28वीं बैठक में मिट्टी-पानी की लवणता, जलभराव व प्राकृतिक खेती पर प्रदर्शन लगाने पर जोर

रोहतक, गिरीश सैनी। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 28वीं बैठक वरिष्ठ संयोजक डॉ. मीना सिवाच की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में सीसीएस एचएयू के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक मुख्य अतिथि रहे, जबकि अटारी, जोधपुर के वैज्ञानिक डॉ. बी.एल. जांगिड़ ऑनलाइन जुड़े। बैठक में कृषि वैज्ञानिकों व विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने किसानों से जुड़े मुद्दों, नई तकनीकों के प्रचार-प्रसार तथा कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा की।

डॉ. नरेश कौशिक ने जिले में मिट्टी एवं पानी की बढ़ती लवणता को देखते हुए संबंधित फसलों पर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन व खेत परीक्षण कराने पर जोर दिया। उन्होंने जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में गेहूं की पछेती किस्मों डब्ल्यूएच-1309 एवं डब्ल्यूएच-1124 के प्रदर्शन आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि किसान उपयुक्त किस्म का चयन कर सकें।

उन्होंने अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने तथा उनके खेतों पर इसके प्रदर्शन लगाने की आवश्यकता बताई। कहा कि किसान स्वयं तकनीक अपनाकर उसके लाभ देखेंगे, तभी इसका व्यापक विस्तार संभव होगा। अधिकारियों ने जलभराव वाले क्षेत्रों में किसानों को मछली पालन के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया।

जिला उद्यान अधिकारी ने सूक्ष्म सिंचाई को विभागीय योजनाओं से जोड़ने की जानकारी देते हुए किसानों को जागरूक करने में कृषि विज्ञान केंद्र से सहयोग मांगा। प्रगतिशील किसान जयकरण ने नवाचार करने वाले किसानों के खेतों के भ्रमण आयोजित करने का सुझाव दिया। बैठक में कृषि वैज्ञानिकों व अधिकारियों ने समन्वय से किसानों की आय बढ़ाने और वैज्ञानिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर बल दिया। डॉ. मीनाक्षी सांगवान ने आभार व्यक्त किया।