एग्रीकल्चर डिस्कॉम व स्मार्ट मीटर के विरोध में बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों का प्रदर्शन, फैसला वापस लेने की मांग
रोहतक, गिरीश सैनी। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एग्रीकल्चर डिस्कॉम, पैरेलल इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस तथा स्मार्ट मीटर योजना के विरोध में प्रदेश भर में सभी सब-डिवीजन कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किए गए। इसी कड़ी में स्थानीय ओल्ड पावर हाउस कॉलोनी स्थित सब अर्बन रोहतक कार्यालय पर भी कर्मचारियों एवं इंजीनियरों ने प्रदर्शन कर सरकार के प्रस्तावित निर्णयों को वापस लेने की मांग उठाई।
प्रदर्शन की अध्यक्षता परमित कुमार ने की, जबकि मंच संचालन धर्मेंद्र फोरमैन ने किया। धरने को संबोधित करते हुए एसडीओ राम प्रसाद ने कहा कि वर्तमान में बिजली विभाग क्रॉस सब्सिडी व्यवस्था के तहत प्रदेश के किसानों को लगभग 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अलग एग्रीकल्चर डिस्कॉम बनाया जाता है तो किसानों को मिलने वाली यह सुविधा समाप्त हो सकती है, क्योंकि प्रस्तावित निगम पर शुरुआती स्तर पर लगभग 5,500 करोड़ रुपये के घाटे का वित्तीय बोझ रहेगा।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम एवं नूंह सर्कल डीएचबीवीएन के कुल राजस्व में लगभग आधा योगदान देते हैं। यदि इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों को पैरेलल इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस दिए जाते हैं तो सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी। जिसका सीधा असर कृषि, ग्रामीण क्षेत्रों तथा छोटे उपभोक्ताओं को मिलने वाली रियायती बिजली पर पड़ सकता है और भविष्य में बिजली दरों में वृद्धि की आशंका भी बढ़ जाएगी।
उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर केवल विभागीय हितों के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भी सरकार से इन प्रस्तावों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार से एग्रीकल्चर डिस्कॉम का प्रस्ताव रद्द करने, पैरेलल इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस जारी नहीं करने तथा उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर जबरन नहीं थोपने की मांग की। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
Girish Saini 

