शैक्षणिक भ्रमण के दौरान सुपवा के छात्रों ने किए गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़ साहिब के दर्शन

जय विलास पैलेस, ग्वालियर फोर्ट में ऐतिहासिक वास्तुकला व चित्रकारी को करीब से देखा।

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान सुपवा के छात्रों ने किए गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़ साहिब के दर्शन

रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा) के छात्रों ने ग्वालियर के शैक्षणिक भ्रमण के दौरान वहां की ऐतिहासिक वास्तुकला व चित्रकारी को नजदीक से देखा। पहले दिन उन्होंने ग्वालियर में जय विलास पैलेस, ग्वालियर फोर्ट व गुरुद्वारे का भ्रमण किया।

विजुअल आर्ट्स विभाग के एफसी विनय कुमार ने बताया कि बैचलर ऑफ विजुअल आर्ट्स के तृतीय वर्ष और मास्टर ऑफ विजुअल आर्ट्स के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी देश के विभिन्न ऐतिहासिक शहरों और इनमें मौजूद इमारतों का अध्ययन करने गए हैं। पहले दिन उन्होंने ग्वालियर में सिंधिया वंश के जय विलास पैलेस को देखा, जो इंडो-सारसेनिक और 19वीं सदी की यूरोपीय वास्तुकला का एक शानदार मिश्रण है। महल के म्यूजियम में प्रदर्शित कला, ऐतिहासिक वस्तुएं और शाही स्मृति चिन्हों का प्रभावशाली संग्रह भारत के शाही अतीत की भव्य जीवनशैली की झलक प्रदान करते हैं।

ग्वालियर फोर्ट के भ्रमण के दौरान पत्थरों की चोटी पर स्थित 8वीं सदी के इस भारतीय वास्तुकला और इंजीनियरिंग का बेजोड़ उदाहरण को समझा। भारी बलुआ पत्थर की दीवारें, भग्नावशेष और द्वार युद्धों, राजवंशों व कथाओं की कहानियां कहते प्रतीत होते हैं। नक्काशीदार जैन मंदिर, भव्य मान सिंह महल और शांत सास-बाई मंदिर बेहतरीन चित्रकारी का उदाहरण पेश करते नजर आते हैं। सायंकाल विद्यार्थियों ने गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़ साहिब, ग्वालियर में श्रद्धा के साथ शीश नवाया।

कुलपति डॉ. अमित आर्य ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहर, वास्तुकला, चित्रकला व अन्य साज-सज्जा से विजुअल आर्ट्स के छात्रों को अवगत कराना विवि प्रशासन का दायित्व है। पढ़ाई के साथ जब वे इन सभी बारीकियों को करीब से देखेंगे तो वे अपने पाठ्यक्रम की महता और अधिक समझ पाएंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक साबित होते हैं।