अकबरकालीन पांडुलिपि द्वादश भाव पर डॉ. अंजलि दूहन की अंतरराष्ट्रीय पुस्तक प्रकाशित
कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ को भेंट की पुस्तक की प्रति।
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के दृश्य कला विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजलि दुहान ने अपनी महत्वपूर्ण शोधपरक पुस्तक कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ को भेंट की। द्वादश भावः संस्कृत कथा का मुगल संस्करण शीर्षक से प्रकाशित ये पुस्तक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक ब्रिल (लाइडन और बोस्टन) तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी (आईआईएएस), शिमला द्वारा प्रकाशित की गई है।
कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने डॉ. अंजलि दूहन को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार का शोध भारतीय कला, इतिहास और साहित्य की विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाता है।
डॉ. अंजलि दूहन ने बताया कि ये पुस्तक मुगल सम्राट अकबर के काल (लगभग 1596 ई.) में तैयार एक दुर्लभ चित्रित पांडुलिपि द्वादश भाव पर आधारित है, जो लंबे समय तक बिखरी हुई अवस्था में रही। वर्ष 1972 तक इस पांडुलिपि को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया था और इसके चित्र निजी संग्रहों में चले गए थे। उन्होंने पहली बार इस बिखरी हुई कृति को एकत्रित कर उसका लिप्यंतरण और अंग्रेजी में अनुवाद प्रस्तुत किया है।
इस पुस्तक में न केवल इस पांडुलिपि का पुनर्निर्माण किया गया है, बल्कि उस दौर में भारत में संस्कृत ग्रंथों के फारसी अनुवाद की परंपरा के संदर्भ में भी इसका विश्लेषण किया गया है। इससे मुगलकालीन अनुवाद प्रक्रिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की नई समझ सामने आती है।
डॉ. अंजलि दूहन ने बताया कि पांडुलिपि में शामिल लघु चित्र केवल सजावटी तत्व नहीं थे, बल्कि वे कथा के अर्थ को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। इन चित्रों के अध्ययन के आधार पर यह भी संकेत मिलता है कि इन्हें मुगल शाही कार्यशाला के विशेष कलाकार समूहों ने तैयार किया था।

Girish Saini 

