दोस्ती से आगे...
कुछ लोग ज़िंदगी में आते नहीं,
धीरे-धीरे धड़कनों में उतर जाते हैं।
फिर हर सुबह उनका ख़याल जगाता है,
हर शाम उनकी याद ठहर जाती है।
बिना मिले भी बातें होती रहती हैं,
ख़ामोशियाँ भी उनसे बातें करती हैं।
भीड़ में भी वही चेहरा दिखाई देता है,
तन्हाई में भी वही साथ निभाता है।
मन हर छोटी-बड़ी बात
सबसे पहले उसी से कहना चाहता है।
उसकी हँसी अपने होंठों पर खिल उठती है,
उसकी उदासी दिल में उतर आती है।
दुआ माँगूँ तो उसका नाम पहले आए,
सलाह दूँ तो बस उसका भला नज़र आए।
न कोई बंधन, न कोई दावा,
न कोई रिश्ता जिसे नाम दिया जाए।
फिर भी ऐसा अपनापन कि
हर पल उसका साथ महसूस हो जाए।
लोग इसे दोस्ती कह देंगे...
पर दिल हर बार मुस्कुरा कर कहता है—
दोस्ती तो एक शब्द है,
हमारा रिश्ता तो उससे भी कहीं बड़ा है।
कुछ रिश्ते लिखे नहीं जाते,
बस जीए जाते हैं...
और शायद वही रिश्ते
ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत इबादत बन जाते हैं।
(ललित बेरी)
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