दोआबा कॉलेज में नेशनल एजूकेशन पॉलीसी 2020 के अंतर्गत च्आऊटकमस बेसड एजूकेशनज् पर सैमीनार आयोजित
जालन्धर, दिसंबर 2, 2022: दोआबा कॉलेज के इंटरनल क्वालिटी अश्योरेंस सेल द्वारा नेशनल एजूकेशन पॉलीसी 2020 के अंतर्गत च्आऊटकमस बेसड एजूकेशनज् पर सैमीनार करवाया गया जिसमें डा. राजीव कुमार गर्ग- प्रोफैसर इंडस्ट्रीयल एवं प्रोड्कशन इंजीनियरिंग, एनआईटी, जालन्धर बतौर रिसोर्स पर्सन उपस्थित हुए जिनका हार्दिक अभिनंदन प्रिं. डा. प्रदीप भंडारी, डा. नरेश मल्होत्रा- आईक्यूसी कोर्डीनेटर, प्रो. संदीप चाहल, डा. सुरिंदर शर्मा, डा. राजीव खोसला व प्राध्यिापकों ने किया।
मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए प्रिं. डा. प्रदीप भंडारी ने कहा कि एनईपी 2020 के दौर में प्राध्यापक अगर सकारात्मक रूप से नई शिक्षा नीति की भावना को समझते हुए अपना योगदान दें तो शिक्षा व शिक्षण संस्थान का स्तर बखूबी ऊँचा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आऊटकमस बेस्ड एजूकेशन में सिलैबस से ज्यादा इस बात पर जोर देने की ज़रूरत है कि अपने कोर्स को पूरा करने के बाद विद्यार्थी में विशेष क्षमताओं और कौशल का विकास किया जा सके।
प्रो. संदीप चाहल ने की-नोट स्पीकर डा. राजीव कुमार गर्ग के बारे में बताते हुए बताया कि वह एक बेहतरीन शिक्षाविद, शोधसास्त्री तथा कुशल प्रशासक है जोकि आऊटकमस बेसड एजूकेशन के अंतर्गत कूरीकूल्म डिज़ाइन, टीचिंग एंड लर्निंग मैथड्स, असैसमेंटस, कॉटिंन्यूल क्वॉलिटी ईम्परूवमेंट, स्टूडैंट मोनीटरिंग, गोल सैटिंग आदि के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे।
मुख्य वक्ता डा. राजीव कुमार गर्ग ने आऊटकमस बेसड एजूकेशन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बलूमस टैक्सोनोमी के तहत छ स्तरों- थिंकिंग, नॉलेज, कोम्परीहेन्शन, एपलीकेशन, एनालसिस, ईवेल्यूएशन व सिंथिसि•ा के बारे में विभिन्न उदाहरणों के साथ समझाया। उन्होंने इनपुट बेसड एजूकेशन व आऊटपुट बेसड एजूकेशन के फर्क को समझाते हुए कहा कि आज की नई शिक्षा नीति के दौर में आऊटपुट बेसड एजूकेशन में लर्निंग ऑबजेक्टिवस, स्टूडैंट लर्निंग आऊटकमस व एजूकेशन आऊटकमस की बहुत महत्ता है जिससे कि विद्यार्थी को अपनी शिक्षा पूर्ण करने के उपरान्त रोज़गार मिलने की ज्याजा संभावना होती है। डा. गर्ग ने कहा कि यह बहुत ज़रूरी है विद्यार्थी अपने लक्ष्य को पहचाने व उन्हें निर्धारित करे ताकि उन्हें सही समय पर अपने सही कैरियर को चुनने कि सेध प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि हर प्राध्यापक को अपने शिक्षण संस्थान के साथ सैंस ऑफ बिलांगिगनैस की भावना विकसित कर अपने विद्यार्थियों को भी ज्यादा समय देना चाहिए ताकि अध्यापक विद्यार्थियों के जीवन में बढिय़ा रोल निभा सकें। डा. नरेश मल्होत्रा ने वोट आफ थैंकस दिया।
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