अनियमित धड़कन को नजरअंदाज न करें, बन सकती है साइलेंट किलरः कुलपति डॉ अग्रवाल

क्रिस्कॉन 2026 में देशभर के हृदय विशेषज्ञ जुटे, रोकथाम पर जोर

अनियमित धड़कन को नजरअंदाज न करें, बन सकती है साइलेंट किलरः कुलपति डॉ अग्रवाल

रोहतक, गिरीश सैनी। हृदय की अनियमित धड़कन (एरिथमिया) को महज घबराहट या थकान समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यह आगे चलकर हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकती है। पीजीआईएमएस, रोहतक में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय हृदय सम्मेलन क्रिस्कॉन 2026 में विशेषज्ञों ने लोगों को हृदय रोगों की रोकथाम और समय पर जांच के प्रति जागरूक किया।

पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि हृदय रोगों से बचाव ही सबसे प्रभावी उपचार है। उन्होंने हाइपरटेंशन, डायबिटीज, मोटापा, बढ़ा कोलेस्ट्रॉल, तंबाकू सेवन, शारीरिक निष्क्रियता और अस्वास्थ्यकर खान-पान को प्रमुख जोखिम कारक बताते हुए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और जांच पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक ने हृदय उपचार में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, लेकिन डॉक्टर और मरीज के बीच मानवीय संबंधों का कोई विकल्प नहीं है। शोध को चिकित्सा प्रगति की बुनियाद बताते हुए उन्होंने चिकित्सकों से मरीजों को करुणा, नैतिकता और भरोसे के साथ बेहतर उपचार देने का आह्वान किया।

पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने बताया कि एरिथमिया आबादी के करीब 1.5 से 5 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करती है और उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ता है। सम्मेलन की थीम एडवांसिंग कार्डियोलॉजी बियॉन्ड बाउंड्रीज रखी गई है। विभागाध्यक्ष डॉ. अश्विनी कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य नई चिकित्सा खोजों को व्यावहारिक मरीज देखभाल तक पहुंचाना है। सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों ने नवीनतम उपचार तकनीकों और शोध पर चर्चा की।