हर लक्षण को सामान्य न समझें, बाल कैंसर पर डॉ. अग्रवाल ने किया आगाह

पीजीआईएमएस में प्रैक्टिकल पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी वर्कशॉप।

हर लक्षण को सामान्य न समझें, बाल कैंसर पर डॉ. अग्रवाल ने किया आगाह

रोहतक, गिरीश सैनी। लगातार बुखार, हड्डियों में दर्द, तेजी से वजन कम होना, पेट या गर्दन में गांठ तथा आंख में सफेद चमक जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये बाल कैंसर के संकेत हो सकते हैं। समय पर पहचान से 80 फीसदी से अधिक बच्चों के पूरी तरह ठीक होने की संभावना रहती है। यह बात पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने शनिवार को पीजीआईएमएस में आयोजित प्रैक्टिकल पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी वर्कशॉप-2026 में कही।

उन्होंने कहा कि बाल कैंसर का असर केवल बच्चे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक दबाव से गुजरता है। इसलिए जागरूकता को सबसे अहम हथियार बताते हुए उन्होंने कहा कि हर चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी को बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की जानकारी होनी चाहिए।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी में विभिन्न विशेषज्ञों को टीम के रूप में काम करना होता है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से कैंसर के क्षेत्र में शोध को मिशन बनाने और ऐसी उपचार सुविधाएं विकसित करने का आह्वान किया, ताकि हरियाणा के बच्चों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।

पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने बताया कि दुनिया में हर साल करीब चार लाख बच्चों में कैंसर की पहचान होती है और लगभग 70 हजार बच्चों की मौत हो जाती है। कार्यशाला में शुरुआती पहचान और नई उपचार पद्धतियों पर चर्चा हुई। इसमें उत्तर भारत के 50 से अधिक चिकित्सकों ने भाग लिया।