उपायुक्त सचिन गुप्ता ने चिन्हित अपराधों से संबंधित सभी मामलों में अदालत में मजबूत पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए

नशा मुक्ति के लिए योजनाबद्ध तरीके से गांव-गांव में होंगे जागरूकता कार्यक्रम।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने चिन्हित अपराधों से संबंधित सभी मामलों में अदालत में मजबूत पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने चिन्हित अपराधों से संबंधित सभी मामलों में अदालत में मजबूत पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नशे के अवैध धंधे में संलिप्त आरोपियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।

 

जिला पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह भोरिया के साथ चिन्हित अपराध एवं एन-कोर्ड की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि चिन्हित अपराधों के अंतर्गत दर्ज मामलों में यदि ठोस साक्ष्यों के साथ प्रभावी पैरवी की जाए, तो नशे के अवैध कारोबार में लिप्त लोगों को कानून के अनुसार सजा दिलाना संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में अवैध रूप से नशे की बिक्री किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस संबंध में ड्रग कंट्रोलर द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि केमिस्ट दुकानों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान एक दवा विक्रेता के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है तथा दो ड्रग पेडलर को गिरफ्तार भी किया गया है।


उपायुक्त ने चिन्हित अपराध के मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि नशे और उसके अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए जागरूकता अभियान अत्यंत आवश्यक हैं। इस संदर्भ में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग एवं समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरेक गांव में योजनाबद्ध तरीके से नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि आमजन, विशेषकर युवा वर्ग को नशे से दूर रखा जा सके। जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिये गए कि वार्षिक परीक्षाओं के उपरांत नशा मुक्ति को लेकर पेंटिंग व डिबेट आदि प्रतियोगिताएं स्कूलों में आयोजित करवाई जाये।


उपायुक्त ने जिला में नशीले पदार्थों के मुख्य सप्लायरों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सभी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षकों, आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर नशा तस्करी व सेवन से जुड़ी जानकारी एकत्र करने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने सिविल सर्जन को निर्देश दिए कि एएनएम/एमपीएचडब्ल्यू/आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से नशा पीड़ितों की पहचान कर सर्वे कराया जाए तथा तैयार डाटा को प्रयास ऐप पर अपलोड किया जाए। साथ ही सभी नशा मुक्ति केंद्रों की जांच कर अवैध रूप से संचालित केंद्रों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पीजीआईएमएस रोहतक के नशा मुक्ति केंद्र सहित अन्य केंद्रों में सुविधाएं सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए।


उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन नशे की आपूर्ति, तस्करी और सेवन के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ के तहत नशा तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। अब तक 44 संपत्ति कुर्की प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी को भेजे गए, जिनमें से 43 प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं। इसके तहत लगभग 6 करोड़ 76 लाख 98 हजार 204 रुपये मूल्य की संपत्ति फ्रीज की जा चुकी है तथा एक प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन का फोकस केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्ति को जब्त कर अपराध की जड़ पर प्रहार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भी नशा तस्करों, सप्लायरों और नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि नशे से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी प्रशासन या पुलिस को दें, ताकि नशा मुक्त रोहतक के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। बैठक में जिला पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह भोरिया, महम के एसडीएम विपिन कुमार शर्मा, ड्रग कंट्रोलर मनदीप मान, जिला न्यायवादी सुरेंद्र पाहवा, महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी दीपिका सैनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।