डीसी सचिन गुप्ता ने अलनीनो के प्रभाव के दृष्टिगत किसानों को कम पानी की खपत वाली फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित।

डीसी सचिन गुप्ता ने अलनीनो के प्रभाव के दृष्टिगत किसानों को कम पानी की खपत वाली फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि अधिकारी अलनीनो के प्रभाव के दृष्टिगत किसानों को कम पानी की खपत वाली फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करें। खरीफ फसल की बुआई के दृष्टिगत रासायनिक खादों के वितरण की विशेष निगरानी की जाये तथा यह सुनिश्चित किया जाये कि रासायनिक खादों की कालाबाजारी न हो पाये। जिला के बनियानी गांव को भी माडौधी गांव के तरह मॉडल गांव की तरह विकसित किया जाये ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि किसानों को धान की सीधी बिजाई व मेरा पानी-मेरी विरासत इत्यादि योजनाओं का लाभ लेने के लिए जागरूक करें। उन्होंने समीक्षा बैठक में विभिन्न कृषि योजनाओं, फसल विविधीकरण, उर्वरकों की उपलब्धता, पीएम किसान सम्मान निधि, प्राकृतिक खेती तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिला में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न खंडों में 10 सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (सीआरपी) की नियुक्ति की गई है। प्रत्येक सीआरपी लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने का कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत खरीफ-2025 में 97 किसानों ने 139.68 एकड़ क्षेत्र में पंजीकरण कराया था, जिनको 5.73 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। वहीं खरीफ-2026 में 132 किसानों ने 137.50 एकड़ क्षेत्र के लिए आवेदन किए हैं, जिनकी प्रक्रिया जारी है।

उपायुक्त ने कहा कि इसी प्रकार ढैंचा फसल के अंतर्गत वर्ष 2025 में 317 किसानों द्वारा 2,014 एकड़ क्षेत्र में खेती की गई थी, जबकि वर्ष 2026 में 1,038 एकड़ क्षेत्र में पंजीकरण किया जा चुका है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त के तहत जिला में कुल 88,980 किसान पंजीकृत हैं। इनमें से 78,054 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है, जबकि 11,676 किसानों की ई-केवाईसी लंबित है।

उपायुक्त ने कहा कि विभाग द्वारा खरीफ 2025-26 के लिए निर्धारित 3,28,567 मृदा नमूनों का संग्रहण कर सभी किसानों को 3,28,657 मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। खरीफ 2026-27 के लिए 49,871 नमूनों का लक्ष्य 10 जून 2026 को प्राप्त हुआ है तथा इस पर कार्य शुरू कर दिया गया है। जिला में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है तथा किसानों को खरीफ फसल की बुआई के दौरान किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जायेगी।

उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल से 23 जून 2026 तक जिला में उर्वरकों की स्थिति संतोषजनक रही। वर्तमान में यूरिया 14,128 मीट्रिक टन, डीएपी 2,270 मीट्रिक टन, एमओपी 461 मीट्रिक टन, एनपीकेएस उर्वरक 815 मीट्रिक टन तथा एसएसपी उर्वरक की 2,206 मीट्रिक टन मात्रा उपलब्ध है। उर्वरकों की कालाबाजारी एवं औद्योगिक इकाइयों में दुरुपयोग रोकने के लिए निगरानी दल गठित किए गए हैं और अब तक जिला में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।

उन्होंने कहा कि जिला में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। रियल हॉर्टिकल्चर एफईडी एफपीसीएल, भाली आनंदपुर में लगभग 300 सदस्य जुड़े हुए हैं तथा 200-250 एकड़ क्षेत्र इसके अंतर्गत आता है। यहां आलू एवं किचन गार्डन की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। द हेल्दी फील्ड प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, सुंडाना में 102 सदस्य जुड़े हुए हैं तथा लगभग 750 एकड़ क्षेत्र इसके अधीन है। यहां आलू, बागवानी फसलें, स्ट्रॉबेरी, तरबूज एवं शिमला मिर्च की खेती की जा रही है। इसके अतिरिक्त एफपीओ द्वारा लघु जैव उर्वरक इकाई तथा तेल मिल का संचालन भी किया जा रहा है।

बैठक में अधिकारियों ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए विभाग निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक समयबद्ध ढंग से पहुंचाने के लिए नियमित निगरानी की जा रही है। इस दौरान मंडल मृदा संरक्षण अधिकारी नीना सहवाग, कृषि उप निदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक, जिला उद्यान अधिकारी मदन लाल, जिला मत्स्य अधिकारी आशा हुड्डा, पशुपालन उप निदेशक डॉ. नरेंद्र दहिया, एसडीएओ संदीप सिंह, एसटीओ डॉ. अनिल सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।