कल्चर लेखक सुकांत दीपक को कर्ण सिंह फाउंडेशन ट्रांसलेशन फेलोशिप
नई दिल्ली: कल्चर लेखक और अनुवादक सुकांत दीपक को प्रतिष्ठित कर्ण सिंह फाउंडेशन ट्रांसलेशन फेलोशिप से सम्मानित किया गया है। यह फेलोशिप उनके आगामी अनुवाद प्रोजेक्ट को समर्थन प्रदान करेगी, जिसके अंतर्गत वे अपने पिता, विख्यात हिंदी साहित्यकार स्वदेश दीपक की चयनित कहानियों का अंग्रेज़ी में अनुवाद करेंगे।
स्वदेश दीपक की रचनाएँ अपनी तीक्ष्ण सामाजिक दृष्टि, भावनात्मक गहराई और जटिल मानवीय अनुभवों के सशक्त चित्रण के लिए जानी जाती हैं। हाल के वर्षों में उनके कार्यों ने अनुवादों के माध्यम से नए पाठक वर्ग तक अपनी पहुँच बनाई है।
नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार के रूप में स्वदेश दीपक 1960 के दशक से हिंदी साहित्य में सक्रिय रहे। उनके खाते में 17 महत्वपूर्ण कृतियाँ दर्ज हैं, जिनमें नाटक, कहानियाँ, उपन्यास और एक चर्चित संस्मरण शामिल है। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में ‘कोर्ट मार्शल’ और ‘मैंने मांडू नहीं देखा’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जिनका अंग्रेज़ी अनुवाद जेरी पिंटो द्वारा किया गया है।स्वदेश दीपक बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित थे और जून 2006 में एक सुबह सैर के लिए निकलने के बाद लापता हो गए।
सुकांत दीपक पूर्व में भी अपने पिता की कहानियों का अनुवाद कर चुके हैं। उनकी अनूदित रचनाएँ जेरी पिंटो द्वारा संपादित और स्पीकिंग टाइगर द्वारा प्रकाशित संकलन ‘अ बुके ऑफ डेड फ्लावर्स’ में शामिल हैं, जिसने स्वदेश दीपक के साहित्य को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी रचनाएँ प्रतिष्ठित पत्रिका ‘इंडियन लिटरेचर’ में भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
अनुवाद कार्य के अतिरिक्त, सुकांत दीपक का व्यक्तिगत और आत्मीय लेख ‘पापा, एल्सवेयर’ स्पीकिंग टाइगर द्वारा प्रकाशित ‘ए बुक ऑफ लाइट’ में शामिल है, जो स्वदेश दीपक के जीवन, रचनात्मकता और विरासत पर एक संवेदनशील दृष्टि प्रस्तुत करता है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सुकांत दीपक का उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने विभिन्न प्रमुख समाचार पत्रों और एजेंसियों के साथ कार्य करते हुए संस्कृति से जुड़े विषयों पर व्यापक लेखन किया है। वर्तमान में वे चंडीगढ़ स्थित इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशन (IDC) से जुड़े हैं, जहाँ वे इसके कला एवं संस्कृति प्रभाग की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
कर्ण सिंह फाउंडेशन, जो डॉ. कर्ण सिंह के सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रेरित है, शिक्षा, सांस्कृतिक संवाद और अंतर्विषयक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यरत है। फाउंडेशन द्वारा प्रदान की जाने वाली यह फेलोशिप ऐसे रचनाकारों को प्रोत्साहित करती है, जिनका कार्य भाषा और संस्कृति की सीमाओं से परे जाकर संवाद स्थापित करता है।
फेलोशिप प्राप्त करने पर सुकांत दीपक ने कहा,“मैं इस सम्मान के लिए हृदय से आभारी हूँ। यह फेलोशिप मेरे लिए न केवल एक रचनात्मक अवसर है, बल्कि अपने पिता के साहित्य को नए पाठकों तक पहुँचाने और उनके रचनात्मक संसार को समझने का एक निजी प्रयास भी है।”
छह महीने की यह फेलोशिप सुकांत दीपक को इस महत्वपूर्ण अनुवाद परियोजना पर केंद्रित होकर कार्य करने का अवसर प्रदान करेगी, जो आधुनिक हिंदी साहित्य की एक विशिष्ट और प्रभावशाली आवाज़ को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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