किसानों के लिए छलावा साबित हुई फसल बीमा योजनाः पूर्व सीएम हुड्डा

किसानों के लिए छलावा साबित हुई फसल बीमा योजनाः पूर्व सीएम हुड्डा

रोहतक/चंडीगढ़, गिरीश सैनी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि फसल बीमा योजना किसानों के लिए सिर्फ छलावा साबित हुई है। जब ये योजना शुरू हुई तो बड़े-बड़े दावे किए गए थे। लेकिन आज हालात यह है कि इसके लाभार्थियों की संख्या घटकर आधी से भी काम रह गई है। इस बार तो खुद सरकार ने खरीफ सीजन के लिए किसानों को पंजीकरण का उचित समय तक नहीं दिया। जो अधिसूचना हर साल 20 से 25 जून के बीच में जारी होती थी, वह इस बार 24 जुलाई को जारी की गई। यानी 11.20 लाख किसानों को पंजीकरण के लिए मुश्किल से एक हफ्ते का समय दिया गया।

हुड्डा ने कहा कि ऐसा लगता है कि सिर्फ किसान ही नहीं, खुद सरकार का अपनी इस योजना से मोहभंग हो गया है। क्योंकि अब तक यह योजना जिस तरह चली है, उसे स्पष्ट है कि इससे किसानों को रत्ती भर भी लाभ नहीं हुआ, उल्टा उनसे हजारों करोड़ रुपए लूटकर निजी कंपनियों की तिजोरियां भरी गई। इसलिए 2018-19 में इस योजना के तहत लाभार्थियों की जो संख्या लगभग 24 लाख थी, वह 2024-25 आते-आते मात्र 11 लाख रह गई। उन्होंने आशंका जताई कि इस बार कम समय होने, सर्वर ठप होने व अन्य प्रशासनिक खानापूर्ति के चक्कर में ही किसानों का ज्यादा समय चला जाएगा और सारे किसान इसके लिए आवेदन तक नहीं कर पाएंगे।

पूर्व सीएम ने आवेदन की तिथि आगे बढ़ाने की मांग उठाते हुए कहा कि सरकार निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की बजाय, किसान हित के बारे में सोच और जरूरत पड़ने पर किसानों को तुरंत मुआवजा दे। अब तक जो पिछला मुआवजा बकाया है, उसका तुरंत प्रभाव से भुगतान किया जाए। साथ ही बीजेपी सरकार जवाब दे कि इस योजना के तहत हर साल मुआवजे की राशि क्यों घटती जा रही है और प्रीमियम की राशि क्यों बढ़ती जा रही है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा के किसानों से तय समय पर बीमा कंपनियां प्रीमियम तो काट लेती हैं, लेकिन जब मुआवजा देने की बारी आती है तो न समय तय होता है न मुआवजा। इतना ही नहीं, फसल नुकसान का आंकलन करने वाली समिति में किसानों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। सरकार और बीमा कंपनियां मिलकर क्लेम निपटारे में मनमानी कर रही हैं, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है