सीएम नायब सिंह सैनी ने पेपरलेस रजिस्ट्री के दूसरे चरण और ऑटो इंतकाल प्रणाली का शुभारंभ किया

डिजिटल हस्ताक्षर, आधार ई-केवाईसी और ऑनलाइन सत्यापन से होगी तेज एवं सरल प्रक्रियाः डीसी सचिन गुप्ता

सीएम नायब सिंह सैनी ने पेपरलेस रजिस्ट्री के दूसरे चरण और ऑटो इंतकाल प्रणाली का शुभारंभ किया

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को मुख्यमंत्री द्वारा पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली के दूसरे चरण तथा ऑटो इंतकाल प्रणाली की शुरुआत की गई है, जिससे प्रदेश के लाखों किसानों एवं भू स्वामियों को बड़ी राहत मिलेगी। इस दौरान प्रदेश के सभी उपायुक्त एवं राजस्व विभाग के अधिकारी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 29 सितंबर 2025 को कुरुक्षेत्र के लाडवा तहसील से पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली की शुरुआत की थी तथा 1 नवंबर 2025 से इसे पूरे प्रदेश में लागू किया गया। अब विभिन्न सुधारों के साथ इसके दूसरे चरण की शुरुआत की गई है, जिसमें रजिस्ट्री के साथ इंतकाल प्रक्रिया को भी जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री के लिए आवेदन प्रपत्र को पहले की अपेक्षा अधिक सरल और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया गया है। दोनों पक्षों के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है, जिससे पहचान की शत-प्रतिशत पुष्टि सुनिश्चित होगी। यदि कोई व्यक्ति, कंपनी, संस्था अथवा एनआरआई स्वयं उपस्थित नहीं हो सकता है तो वह एक से अधिक व्यक्तियों को अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर सकेगा।

उपायुक्त ने बताया कि नागरिक स्वयं, डीड राइटर, अधिवक्ता अथवा हेल्प डेस्क के माध्यम से डीड भर सकेंगे। इसके अलावा रजिस्ट्री के समय संबंधित भूमि का कौन-सा भाग प्राइम श्रेणी तथा कौन-सा नॉन-प्राइम श्रेणी में आता है, इसकी जानकारी स्वत: सिस्टम में उपलब्ध होगी। संपूर्ण प्रक्रिया में डिजिटल हस्ताक्षर एवं बायोमेट्रिक प्रणाली लागू की गई है तथा अधिकतम तीन अवसरों के भीतर मामलों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीटीपी और एनओसी के लिए अलग से दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होगी तथा विभागीय सत्यापन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा। वर्तमान प्रणाली में अलग-अलग स्तरों पर किए जाने वाले आरसी-1 एवं आरसी-2 के कार्यों को भी एकीकृत कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा ऑटो इंतकाल प्रणाली की भी शुरुआत की गई है। प्रदेश में लगभग पांच लाख लंबित इंतकालों में से चार लाख मामलों का निपटान किया जा चुका है। पायलट आधार पर एक माह तक प्रणाली के सफल संचालन के दौरान प्राप्त सुझावों और फीडबैक को शामिल करते हुए इसे और अधिक प्रभावी बनाया गया है। प्रारंभिक चरण में ही लगभग 50 हजार इंतकाल स्वत: दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत हो जाएगा, जबकि जिन मामलों में खेवट विभाजन आवश्यक होगा, उनमें अधिकतम 10 दिनों के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी 15 दिनों के भीतर शेष सभी लंबित इंतकालों का समयबद्ध समाधान करना है।

उपायुक्त ने कहा कि अब रजिस्ट्री और इंतकाल की प्रक्रियाएं एक-दूसरे से जुड़ जाएंगी तथा नागरिकों को अलग से इंतकाल के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। नागरिक अपने इंतकाल की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे तथा उसकी प्रति डाउनलोड और प्रिंट भी कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे ये ऐतिहासिक और क्रांतिकारी सुधार सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। इस दौरान सांपला की एसडीएम अंकित पुवार, रोहतक के एसडीएम आशीष कुमार, महम के एसडीएम विपिन कुमार शर्मा, जिला राज्यसभा अधिकारी मनवीर सिंह व सभी तहसीलों के तहसीलदार व नायब तहसीलदार मौजूद रहे।