जीवन में सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण, कड़ी मेहनत व अनुशासन आवश्यक हैः सीजेआई सूर्यकांत
मुख्य न्यायाधीश एमडीयू के विशिष्ट पूर्व छात्र अलंकरण से सम्मानित।
रोहतक, गिरीश सैनी। जीवन में सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण, कड़ी मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य प्राप्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति आवश्यक है। इस मार्ग पर सत्यनिष्ठा, मूल्य और नैतिकता के साथ-साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये उद्गार भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं एमडीयू के विधि विभाग के पूर्व छात्र न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विवि के स्वर्ण जयंती एवं एलुमनाई अभिनंदन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विवि में बिताए गए दिनों को याद करते हुए कहा कि विवि परिसर में उन्हें कभी उनकी ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। यहां मिले प्रतिभा, परिश्रम और बौद्धिक क्षमता के मूल्य उनकी जीवन यात्रा और न्यायिक सोच की मजबूत नींव बने। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विद्यार्थियों से नैतिक मूल्यों, संविधान की भावना और न्याय के सिद्धांतों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि विवि ने पिछले पांच दशकों में शिक्षा, अनुसंधान, खेल, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि विवि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बहु विषयक शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और शोध को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने एलुमनाई को विवि की गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
समारोह के दौरान एमडीयू की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश को स्मृति-चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू का भी अभिनंदन किया गया। समारोह में विवि के पूर्व छात्र एवं भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को विशिष्ट पूर्व छात्र अलंकरण से सम्मानित किया गया। सम्मान-पत्र में न्यायमूर्ति सूर्यकांत की प्रेरक जीवन यात्रा का उल्लेख किया गया। जुलाई 2000 में हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता के रूप में नियुक्ति से लेकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने की उनकी न्यायिक यात्रा साझा की गई।
इस दौरान विशिष्ट पूर्व छात्रों को न्यायपालिका, विधि व्यवसाय, खेल, साहित्य, लोक संस्कृति, प्रशासन, चिकित्सा, शिक्षा और कॉरपोरेट नेतृत्व सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने आभार व्यक्त किया। प्रो. शालिनी सिंह और प्रो. आशीष दहिया ने कार्यक्रम का संचालन किया।
इस दौरान के उपायुक्त सचिन गुप्ता, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस.सी. मलिक, पूर्व कुलपति (एमडीयू) इंजीनियर एच.एस. चहल, प्रतिष्ठित शिक्षाविद डॉ. सीता राम व्यास, रविन्द्र सक्सेना सहित विशिष्ट जन, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, प्रतिष्ठित एलुमनी व शहर के गणमान्य जन मौजूद रहे।
न्यायपालिका के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए हाई कोर्ट के न्यायाधीशों संजय वशिष्ठ, राजेश भारद्वाज, हरकेश मनुजा, वीरेंद्र अग्रवाल, कुलदीप तिवारी, हरसिमरन सेठी, विकास सूरी, अमन, गुलचंदा तथा बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड चंडीगढ़ के चेयरमैन विजेंद्र गहलावत तथा इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के वाइस प्रेसिडेंट राजपाल यादव को सम्मानित किया गया।
विशिष्ट योगदान के लिए पद्मश्री योगेश्वर दत्त, महाबीर गुड्डू व डॉ. संत राम देसवाल, द्रोणाचार्य अवॉर्डी अरुण दहिया, अर्जुन अवॉर्डी सुनील डबास व राजकुमार सांगवान, सिविल एडमिनिस्ट्रेशन में योगदान के लिए महेंद्र श्योराण, नरहरि बांगड़, मनदीप मान तथा पुलिस सेवा में योगदान के लिए डॉ. सुमन मंजरी आईपीएस, डॉ. राजश्री आईपीएस तथा राकेश कुमार आर्य आईपीएस को सम्मानित किया गया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने पूर्व शिक्षकों प्रो. रणबीर सिंह, प्रो. केपीएस महलवार, प्रो. पीसी जुनेजा, प्रो. प्रीत सिंह, प्रो. अमर वर्मा से भी भेंट की।
सीजेआई ने किया स्वर्ण जयंती द्वार का लोकार्पण।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने एमडीयू परिसर में नवनिर्मित स्वर्ण जयंती द्वार का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ये स्वर्ण जयंती द्वार झज्जर बाईपास की ओर बनाया गया है, जिससे विवि में प्रवेश और निकास की व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित और सुगम होगी। धौलपुर एवं लाल पत्थर की क्लैड्डिंग इस द्वार को भव्य और आकर्षक स्वरूप प्रदान करती है।

Girish Saini 

